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सबरीमाला: परंपरा से जुड़ी रहेंगी महिला श्रद्धालु

चेन्नै

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। भगवान अयप्पा की महिला अनुयायियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं मानेंगी और सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ही मंदिर में प्रवेश करेंगी।

चेन्नै के वेल्लुवर कोट्टम नामक स्थान पर महिला अनुयायियों ने सबरीमाला अयप्पा सेवा समाजम के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ही प्रवेश करने की प्रतिज्ञा की। केरल के परंपरागत वाद्ययंत्र ‘चेंडा मेलम’ के साथ पूजा कार्यक्रम के बाद आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने यह निर्णय लिया। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन जारी है।

भगवान अयप्पा के भक्तों ने रैली निकाली और मांग की, कि मंदिर के प्रथाओं को जबरन न बदला जाए। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां ले रखी थी, जिसमें ‘सेव सबरीमाला’ और ‘परंपरा बचाओ’ लिखा हुआ था। भक्तों का कहना था कि भगवान अयप्पा एक ‘नैश्तिका ब्रह्मचारी’ थे और इसलिए महिलाओं का मासिक धर्म के दौरान वहां प्रवेश वर्जित है। इस कार्यक्रम में पुरुषों ने भी भागीदारी की।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर प्रवेश का अधिकार दिया है। जबकि मान्यता के अनुसार वहां 10 से 50 वर्ष उम्र की महिलाओं का प्रवेश इस मंदिर में बंद है। मान्यता के अनुसार जिन महिलाओं को मासिक धर्म होता है, उनका प्रवेश वर्जित है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगे बैन को हटाने का आदेश दिया था। सर्वोच्च अदालत ने शताब्दियों पुरानी इस धार्मिक परंपरा को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था।

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