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सानंद के पार्थिव शरीर को नहीं दे सकते: ऋषिकेश एम्स

देहरादून

ऋषिकेश एम्स प्रशासन ने स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मातृ सदन में रखे जाने संबंधी मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। एम्स प्रशासन ने कहा कि स्वामी सानंद अपनी देह एम्स को दान कर चुके हैं, परिजन भी सहमति जता चुके हैं, इसलिए दान की हुई वस्तु को वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है। बता दें कि एम्स निदेशक को पत्र लिखकर मातृसदन ने मांग की थी कि तीन दिनों के लिए स्वामी सानंद का शरीर मातृसदन में रखवाया जाए ताकि उनके अनुयाई अंतिम दर्शन कर सकें।

ऋषिकेश एम्स के निदेशक प्रॉ. रविकांत ने कहा कि स्वामी सानंद उपवास तोड़ना चाहते थे, मगर परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति उन्हें रोक रहा था। इस बात के ठोस आधार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘स्वामी सानंद तीन बार एम्स में भर्ती किए गए। उनके साथ हमारी कई मर्तबा बातचीत हुई है, अगर ऐसा पता होता तो हम उसकी भी रिकॉर्डिंग करते।’ मातृ सदन द्वारा स्वामी सानंद की मौत के षड्यंत्र में शामिल होने संबंधी आरोप को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘हम किसी को झूठ बोलने से कैसे रोक सकते हैं।’

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत के अनुसार, स्वामी सानंद के शरीर में ग्लूकोज और पोटैशियम की कमी के कारण गुरुवार दोपहर हृदयघात हुआ, जिससे उनकी मौत हुई। उन्हें उच्च रक्तचाप की शिकायत रहती थी, जो डेंजर लाइन तक पहुंच जाता था, इसकी वह दवा ले रहे थे। उनके हार्ट के आर्टिक वॉल्व में दो ब्लॉकेज थे, जिसका उन्होंने इलाज नहीं कराया। स्वामी सानंद को हर्निया की भी शिकायत थी। लंबे समय से वह इन खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे थे। रविकांत ने कहा कि शरीर में अचानक ग्लूकोज और पोटैशियम की कमी आने के कारण उनके हृदय ने काम करना बंद कर दिया।

प्रो. रविकांत ने बताया कि गुरुवार सुबह ऋषिकेश के उप जिलाधिकारी के साथ वार्ता के बाद स्वामी सानंद को दिल्ली रिफर करने की तैयारी की गई थी। शाम तक उन्हें दिल्ली भेजना था। मगर, इससे पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। बता दें कि गंगा रक्षा के लिए 112 दिन की तपस्या (अनशन) के बाद उनके निधन पर मातृ सदन में गुस्सा है।मातृसदन से जुड़े साधु शुक्रवार को ऋषिकेश एम्स में उनके अंतिम दर्शन के लिए अनुमति दिए जाने की मांग करते रहे जिसे एम्स ने नहीं माना। धर्मनगरी का संत समाज भी उनकी मृत्यु से दुखी है।

पंचदशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने कहा कि स्वामी सानंद ने गंगा रक्षा को अपने प्राणों की आहुति दी है। गंगा रक्षा के यज्ञ को आगे बढ़ाना होगा। काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने स्वामी सानंद के निधन पर गहरा शोक जताते कहा कि मां गंगा हमारी आस्था की प्रतीक है। मां गंगा की निर्मलता के लिए संत समाज सदैव समर्पित रहता है। जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि यह दुख की घड़ी है। सभी संत इससे व्यथित हैं।

वहीं, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद ने कहा कि गंगा रक्षा के लिए गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। जयराम आश्रम के पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने भी स्वामी सांनद के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि गंगा रक्षा के लिए संतों के प्राणों के बलिदान पर अब तो गंभीरता दिखनी चाहिए। आने वाले दिनों में गंगा रक्षा के लिए संत बड़ा कदम उठाएंगे। जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि गंगा के लिए स्वामी सानंद के बलिदान को ब्यर्थ नहीं जाने देंगे। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू कर मकर संक्रांति तक इसको लेकर यात्रा की जाएगी।

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