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#MeToo अभियान से नहीं खत्म होगा यौन शोषण: महेश भट्ट

बॉलिवुड के भीष्म पितामह महेश भट्ट ने तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर विवाद सहित तमाम दूसरे सेक्शुअल हैरसमेंट के आरोपों पर अपनी बात कही। नवभारतटाइम्स डॉट कॉम से हुई खास बातचीत में भट्ट कहते हैं कि यह सारा दोष सामाजिक मानसिकता का है। अगर आपको लगता है कि #MeToo अभियान और कोर्ट-कचहरी से यौन शोषण की समस्या का समाधान होगा तो ऐसा नहीं है। यह सब समाज की सोच, मानसिकता और रहन-सहन के बदलाव के बाद बदलेगा।

महेश कहते हैं, ‘सबसे पहले तो हमें यह तय करना होगा कि सेक्शुअल हैरसमेंट क्या है। हम यौन शोषण उसे कहेंगे जब काम करने की जगह में जब आप अपनी ताकत का दुरुपयोग कर किसी महिला का उत्पीड़न करते हैं। महिला जब आपको बता दे कि आप एक लक्ष्मण रेखा पार कर रहे हैं, उसके बाउजूद आप जिद न छोड़ें और लगातार हरकत करते रहे, यह हरकत यौन शोषण की कैटिगरी में आएगा। वह महिला तो बेचारी रोजगार कमाने आई है, लेकिन आपने उसे अपनी जागीर समझ ली है। जब तक शक्तिशाली व्यक्ति किसी को कुचलता नहीं है, उसका खाना नहीं हजम होता है।’

एक उदाहरण द्वारा महेश समझाते हैं, ‘हमारी फिल्म की एक राइटर हैं, जो मुझे बता रही थीं कि जब हम घर से स्कूल के लिए निकलते थे, तब पब्लिक बस में आना-जाना होता था। वह पूरे रास्ते मर्दों के बीच में अपने जिस्म को बचाते हुए बड़ी मुश्किल से रास्ता पार करती थी, कभी आगे से तो कभी पीछे से अलग-अलग मर्द हमें छूता था, हम प्रार्थना करते थे कि यह रास्ता जल्दी ख़त्म हो जाए। वह स्कूल जाने के ख्याल से कांप जाती थी, यह होता है यौन शोषण।’

भट्ट कहते हैं, ‘यह यौन शोषण की समस्या न तो #MeToo से समाप्त होगी, न ही पुलिस, कोर्ट और कचहरी के चक्कर काटने से खत्म होगी। कोर्ट में यह सब प्रूव करना मुश्किल हो जाता है। हम तो औरतों को तो कोख में मार देते हैं। हमने जब फिल्म ‘तमन्ना’ बनाई थी, तो उसमें यही सब विषय था। फिल्म को टैक्स फ्री कराने के लिए जब हम दिल्ली में मंत्री से मिले तो उन्होंने मेरी बेटी पूजा भट्ट को कहा था कि हमारे देश में यह कहां होता है यह तो चीन में होता है, हम तो औरतों की पूजा करते हैं। मैंने सोचा इन्हें तो लानत भेजूं, जिनके हांथ खून से रंगे हुए थे, वह क्या कह रहे हैं। आज इतने सालों बाद हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ। यह सब बातें आपस में जुड़ी हैं।

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