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जम्मू-कश्मीर: जल्द विधानसभा चुनाव कराने के पक्ष में राज्यपाल

श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक राज्य में जल्द विधानसभा चुनाव के पक्ष में हैं। गवर्नर मलिक ने कहा है कि जून में पीडीपी-बीजेपी की सरकार गिरने के बाद उन्हें नहीं लगता कि वर्तमान हालात में राज्य में एक लोकप्रिय सरकार बन सकती है।

पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से राज्य में राज्यपाल शासन लागू है। जून में बीजेपी ने गठबंधन सरकार के अलग होते हुए समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद से ही पर्दे के पीछे से नई सरकार बनाने की सुगबुगाहट देखी गई। 87 सदस्यीय विधानसभा में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है। सदन में पीडीपी के 28, बीजेपी के 25 और नैशनल कॉन्फ्रेंस के 15 विधायक हैं।

पिछले दरवाजे से सरकार गठन की अटकलों पर ब्रेक लगाते हुए राज्यपाल मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि ऐसी किसी भी कवायद का हिस्सा नहीं हैं। जब उनसे कहा गया कि वर्तमान परिदृश्य में क्या एक लोकप्रिय सरकार बन सकती है, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं ऐसा नहीं सोचता। कम से कम मैं किसी भी धांधली का हिस्सा नहीं बनूंगा। मुझे प्रधानमंत्री या फिर किसी अन्य केंद्रीय नेता से इस संबंध में कोई संकेत नहीं मिले हैं।’

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल दिसंबर 2020 में खत्म होना है। जब गवर्नर से पूछा गया कि क्या राज्य में जल्द चुनाव हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि राज्य में जल्द से जल्द चुनाव हों। उन्होंने कहा, ‘इस बारे में फैसला केंद्र और चुनाव आयोग को लेना है। मेरा काम दोहरी जिम्मेदारी (राज्यपाल और प्रशासक) को निभाना है, जिसे में लगातार जारी रखूंगा। मेरी इच्छा है कि चुनाव जल्द से जल्द हों।’

संविधान के अनुच्छेद 35A के विवादित मुद्दे पर राज्यपाल ने कहा कि उनका प्रशासन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि हम कोई चुनी हुई सरकार नहीं हैं और जब तक कोई चुनी हुई सरकार नहीं आ जाती है इस मामले की सुनवाई को टाल दिया जाए।’

31 अगस्त के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अगले साल जनवरी के दूसरे हफ्ते में लिस्ट करने के निर्देश दिए थे। 35A को चुनौती देने के खिलाफ कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और इसी वजह से राज्य की दो मुख्य पार्टियों नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने हाल ही में हुए निकाय चुनाव का बहिष्कार किया था।

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