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अफसरों पर खास मेहरबानी

भोपाल

भेल भोपाल युनिट में विजिलेंस विभाग के अफसरों पर कुछ खास मेहरबानी किसी के गले नही उतर रही है। इस मेहरबानी के पीछे कारण कुछ भी हो लेकिन प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चाएं गर्म है कि इस विभाग के एक अपर महाप्रबंधक सीवीओ की गाईड लाइन के बाद साढ़े आठ साल से विभाग के मुखिया बने हुये है जबकि एक और अपर महाप्रबंधक करीब छह साल से कुंडली मारे हुये है जबकि एक उप महाप्रबंधक हटने का नाम ही नहीं ले रहे। चर्चा है कि गाईड लाइन के मुताबिक तीन साल से ज्यादा समय तक इस विभाग में कोई अफसर नहीं रह सकता। खबर यह भी है कि झांसी यूनिट से इसी विभाग के एक अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी का तबादला भोपाल यूनिट कर दिया गया है लेकिन यह साफ नही हो पा रहा कि यह मूल विभाग ही देखेंगे या कोई अन्य। सालों से जमे अफसरों को इस विभाग में बिठाये रखना विभाग की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा रहा है।

गोविंदपुरा विस चर्चाओं में

यह पहला मौका है कि गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस अपने उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई। भाजपा का गढ़ होने से यहंा उम्मीदवार घोषित न होने से चर्चाओं का विषय बना हुआ है रही बात कांग्रेस की तो इस गढ़ को फतह करना इतना आसान नहीं फिर भी कांग्रेस योग्य प्रत्याशी नहीं तलाश पा रही है। इस बार इस विस क्षेत्र में चुनाव रोचक होने की खबर ने नेताओ को परेशान कर रखा है। इस क्षेत्र में भाजपा के एक कद्दावर नेता को उतारने की चर्चा के बाद दूसरे उम्मीदवारों के हौसले पस्त पड़ते दिखाई दे रहे हैं वही कांग्रेस में भी स्थानीय उम्मीदवारों में निराशा का माहौल दिखाई देने लगा है। यहां तक कि भाजपा के एक नेता तो इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩे का मन बना चुुके है। कांग्रेसियों में इस बात की चर्चाएं भी है कि इस बार एक निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देने के चक्कर में कहीं कांग्रेस अपना उम्मीदवार ही न खड़ा करे। इस बात में कितना दम है यह तो तब ही पता चल पायेगा जब दोनों पार्टी अपना-अपना प्रत्याशी घोषित करेंगी।

एक अपर महाप्रबंधक ध्यान योग में

भेल कारखाने के एक अफसर ध्यान योग में इतने मस्त है कि उन्हें कंपनी की चिंता बिल्कुल नहीं सताती। मामला भेल के फेब्रीकेशन विभाग से जुड़ा हुआ है। छोटे साहब तो छोटे साहब बड़े साहब शुभान अल्लाह। यह हाल है एक फेब्रीकेशन के अपर महाप्रबंधक के। विभाग के कर्मचारी यह कहने से नही थकने कि साहब को भेल से कोई लगाव ही दिखाई नहीं देता जब मर्जी हुआ दस पन्द्रह दिन का अवकाश लिया और ध्यान योग में समा गये। ऐसा भी नहीं कि भेल के मुखिया इस ध्यान योग कार्यक्रम से वाकिफ न हो लेकिन इन्हें हटाने का साहस उनमें दिखाई नहीं दे रहा।

मामला टीएसडी विभाग का

भेल कारखाने में टीएसडी विभाग एक ऐसा विभाग है जो हमेशा से चर्चाओं में रहा है लेकिन बड़े साहब कि मेहरबानी के चलते इस विभाग के अफसरों पर हाथ डालना कारपोरेट की भी बसकी नहीं है। कर्मचारी तो वैसे ही यहां के अफसरों की प्रताडऩा से परेशान है चर्चां है कि जब कारखाने के हर विभाग में कर्मचारियों को ओवर टाईम दिया जा रहा है तो टीएसडी विभाग अपने कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रहा है और रही बात इस विभाग के उस अपर महाप्रबंधक की जो मुखिया कि गोद में बैठकर कर्मचारियों को परेशान करने में लगा हुआ है। यहां तक कि बीई की ट्रेनिंग करने वाली एक युवती ने तो परेशान होकर एचआरडीसी विभाग में गुहार लगाकर अपना ट्रांसफर इस विभाग से ही करा लिया। चर्चां है कि एजीएम साहब लगातार परेशान कर रहे थे।

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