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मामला राजभाषा विभाग का

भोपाल

राजभाषा विभाग के एक अधिकारी की मनमानी के चर्चे आम हो गए हैं। इसके चलते विभाग के अधिकारी और कर्मचारी डरे सहमे हुए हैं। कुछ माह पहले उन्होंने एक अधिकारी पर मनगढ़ंत आरोप लगा दिए, यही नहीं उनकी शिकायत भी कर डाली। मजबूरन प्रबंधन ने इसके लिए एक जांच कमेटी भी बना डाली। मजेदार बात यह है कि इस जांच कमेटी की महिला अधिकारी ने शिकायत सही नहीं पाए जाने के बावजूद उन पर उल्टे जिन पर आरोप लगाए थे उस अधिकारी का तबादला जरुर कर डाला। उसके बाद राजभाषा विभाग की इस अधिकारी ने एक अपर महाप्रबंधक स्तर के एक और अधिकारी के खिलाफ शिकायत दिल्ली तक कर डाली। कहा तो यहां तक जा रहा है कि जांच अधिकारी तक की शिकायत की गई। ऐसे में भेल के मुखिया क्यों एक्शन नहीं ले रहे हैं इसकी चर्चा विभाग में की जा रही है।

दीनबन्धु दुखहर्ता तुम…

भेल कारखाने में दीनबंधु दुखहर्ता तुम ठाकुर मेरे की आरती कुछ अफसर गुपचुप करते नजर आ रहे हैं। ये पंक्तियां किस पर लागू होती हैं यह सब बताने की जरुरत नहीं है। जब जून 2018 में प्रमोशन और ट्रांसफर की बहार थी तब भेल के मुखिया ने अपने चहेते अफसरों को जहां प्रमोशन दिलाने में सफलता हासिल की वहां कुछ अफसरों को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया। लेकिन अपना भोलापन आजतक नहीं छोड़ा। इसके चलते कुछ अफसर बजाय मुखिया की सुनने के अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगे हुए हैं। वहीं उनकी स्वार्थ सिद्धि पकड़ी भी जाए बड़े साहब मीठी डांट फटकार लगाकर उन्हें चलता कर देते हैं। ऐसा लंबे समय से चल रहा है और भीतर ही भीतर कुछ अफसर मजे से चांदी काट रहे हैं। उस पर यह कहने लगते हैं कि जब तक साहब हैं तब तक सब ठीकठाक चलता रहेगा। वह दीनबंधु दुखहर्ता तुम ठाकुर मेरे की भूमिका में हैं।

एजीएम साहब नहीं ले रहे दिलचस्पी

चर्चा है कि एक ओर तो भेल के चेयरमैन और ईडी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए दिन-रात प्लान कर रहे हैं तो दूसरी ओर कारखाने के एमएम ग्रुप के एक अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी काम में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखा रहे हैं। इसका असर सीधे प्रोडक्शन पर पड़ रहा है। मामला स्टील प्लेट खरीदी से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस ग्रुप के एक एजीएम स्टील प्लेट खरीदी समय पर नहीं कर पा रहे हैं यानि लापरवाही दिखा रहे है इससे उत्पादन काफी प्रभावित हो रहा है। इससे भेल के मुखिया भी काफी परेशान हैं। ऐसे में विभाग के क्या हाल होंगे इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। साहब के ढीलेपन की चर्चा विभाग के कर्मचारी दबी जुबान करते नजर आते हैं। ऐसे ही कुछ हालात ईएम ग्रुप के बताए जा रहे हैं।

गोविन्दपुरा में गुटबाजी चरम पर

पिछले चुनाव के मुकाबले इस विधानसभा चुनाव में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। पहले एक गुट ने परिवारवाद का विरोध कर सुंदरकांड का पाठ कराकर विरोध प्रदर्शन किया तो दूसरी ओर गौर समर्थकों ने भी टिकट की मांग को लेकर प्रदर्शन कर डाला। चर्चा है कि बंगले से फोन आया और उनके समर्थक बरखेड़ा पठानी के मंदिर में अबकी बार, कृष्णा गौर के नारे लगाते रहे। लेकिन आश्चर्य तो तब हुआ जब उनमें से कुछ कार्यकर्ता पार्टी छोडऩे व चुनाव के बहिष्कार करने की बात करने लगे। ऐसे में भाजपा संगठन और आरएसएस के वफादार यह कहते नजर आए कि आखिर यह हो क्या रहा है। दरअसल उन्हें यह सब नागवार गुजर रहा था। इधर कांग्रेस में इस विधानसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार तो हैं लेकिन इसको लेकर धरना-प्रदर्शन दिखाई तक नहीं दे रहा है। यहां के मतदाता इस बात से परेशान है कि भाजपा में इस बार इस तरह की गुटबाजी क्यों दिखाई दे रही है। वह दोनों गुटों को बुरा भला कहने से नहीं चूक रहे हैं।

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