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गोविन्दपुरा में दो दशक बाद कांग्रेस को मिला स्थानीय उम्मीदवार

भाजपा-कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर, बंटी मिठाईयां

भोपाल

गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने दो दशक बाद स्थानीय उम्मीदवार को टिकट देकर भाजपा के सामने एक कड़ी टक्कर पेश की है। चार दशक से हार रही कांग्रेस में जान फूंक कर युवा उम्मीदवार गिरीश शर्मा से भाजपा नेत्री श्रीमती कृष्णा गौर का कड़ा मुकाबला साफ दिखाई दे रहा है। अब देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है। गुरुवार को दोनों दल के खेमे में खुशी की लहर देखी गई। उनके समर्थक एक दूसरे के गले लगकर बधाई देने के साथ मिठाई आदि बांट रहे थे। आज से चुनाव प्रचार का घमासान शुरु होगा। यूं तो दोनों उम्मीदवारों की तैयारियां पहले से ही शुरु हो गई थीं।

गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र में जब-जब कांग्रेस ने स्थानीय प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाया, हार का अंतर कम होता चला गया और जब-जब बाहरी प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाया हार का अंतर बढ़ता ही चला गया। इस बार कांग्रेस ने दो बार से पार्षद स्थानीय युवा नेता टिकट देकर यह बताने की कोशिश की है कि वह यह सीट हर हाल में भाजपा से छीनना चाहते हैं। इस फैसले से कांग्रेसियों में जान आ गई है। इस क्षेत्र के रहवासी भी लंबे समय से बाहरी नेताओं को थोपने से काफी नाराज दिखाई दे रहे थे। स्थानीय प्रत्याशी उतारने से कांग्रेस भाजपा को कितनी टक्कर दे पाएगी यह तो चुनाव प्रचार के बाद ही दिखने लगेगा।

गौरतलब है कि वर्ष 1998 में थ्रिफ्ट सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष करनैल सिंह कांग्रेस के ऐसे एकमात्र स्थानीय उम्मीदवार थे जो कि भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल गौर से 10883 मतों से हारे थे। इसके बाद से लगातार बाहरी को उम्मीदवार बनाया गया। 2003 में कांग्रेस ने शिवकुमार उरमलिया को उम्मीदवार बनाया जो 64212 मतों से हारे। इसके बाद वर्ष 2008 में पूर्व महापौर श्रीमती विभा पटेल को चुनाव मैदान में उतारा, उन्होंने हार का अंतर कम करते हुए 33754 पर लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन वर्ष 2013 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को जब इस विधानसभा से टिकट दिया तो यह अंतर बढ़कर 70644 पहुंच गया। यानि भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल गौर को जहां 1,16,586 मत मिले तो श्री गोयल को 45,942 मत पाकर संतोष करना पड़ा।

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