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बिहार: LJP-RLSP ने किया साफ, 2014 के चुनावों से कम सीटों का सवाल ही नहीं

पटना

बिहार में बीजेपी के दो बड़े सहयोगी दलों एलजेपी और आरएलएसपी ने साफ कर दिया है कि उन्हें 2019 आम चुनाव में 2014 जितनी ही सीटें चाहिए। संभावना जताई जा रही थी कि केंद्र में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की ओर से बिहार में बीजेपी और जेडीयू 40 में से 34 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकते हैं। बाकी की 6 सीटें राम विलास पासवान की एलजेपी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी को दिए जाने की अटकलें थीं।

2014 में बिहार में बीजेपी ने 22 सीटें सीटें जीती थीं। राम विलास पासवान की एलजेपी सात सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उनमें से छह पर जीत हासिल की थी। उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और तीनों पर जीत हासिल की थी।

बीजेपी-जेडीयू ने दी है 50-50 फॉर्म्यूले पर सहमति
बिहार एलजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य सरकार में मंत्री पशुपति पारस ने साफ किया कि उनकी पार्टी सीट शेयरिंग के मुद्दे पर कोई त्याग नहीं करने वाली और उन्हें पहले जितनी ही सीटें चाहिए। बता दें कि जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष पहले ही समान सीटों पर चुनाव लड़ने की सहमति दे चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा था कि इसका असर एलजेपी और आरएलएसपी की सीटों की संख्या पर पड़ेगा।

पशुपति पारस ने साफ कहा, ‘सीट शेयरिंग पर कोई भी चर्चा तब तक फाइनल नहीं मानी जाएगी जब तक बिहार में एनडीए के चारों घटक दलों के अध्यक्ष साथ बैठकर कोई आम राय नहीं बनाते। यह अभी होना बाकी है। मीडिया में जो भी बताया जा रहा है, वह सब हवा-हवाई है।’

‘…तो 40 में से 20 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ें बीजेपी-जेडीयू’
उन्होंने कहा, ‘2014 के बाद से हमारा ग्राफ नहीं गिरा है। कोई कारण नहीं बनता है कि हम 2014 से कम सीटों पर चुनाव लड़ें।’ बीजेपी और जेडीयू के 50-50 फॉर्म्यूले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘यह फॉर्म्यूला कुछ भी हो सकता है। शायद बीजेपी और जेडीयू 10-10 सीटों पर ही चुनाव लड़ें और बाकी की 20 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ दें।’

उधर आरएलएसपी के प्रवक्ता और राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद ने कहा, ‘तीन सीटों से कम पर सहमति का कोई तुक ही नहीं बनता है। उपेंद्र कुशवाहा ने इस बारे में बिहार के प्रभारी भूपेंद्र यादव को व्यक्तिगत तौर पर और अमित शाह को फोन पर बता दिया है।’

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