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मोबाइल बैन पर बरसे नेता, करोड़ों खर्च करने के बाद भी भेल ने किया मोबाइल बैन

यूनियनों ने जताया विरोध, कहा-डिजिटल इंडिया का मजाक उड़ा रहा है भेल

भोपाल

भेल प्रशासन ने कारखाने की सुरक्षा का हवाला देते हुए कर्मचारियों को काम के दौरान कारखाने में मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। ये आदेश 12 नवंबर से लागू होगा। इसके पहले भेल की यूनियनों ने लामबंद होकर भेल प्रबंधन को चेतावनी देते हुए विरोध दर्ज कराया है। यूनियनों की मानें तो भेल प्रबंधन सुपरवाइजर और अफसरों को सालाना करोड़ों रुपये मोबाइल के नाम पर खर्च कर रही है। ऐसे में प्रबंधन का तुगलकी फरमान किसी के गले नहीं उतर रहा है। इसकों लेकर यूनियनों ने यहां तक कह डाला कि एक ओर तो केन्द्र सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है तो दूसरी ओर भेल प्रबंधन इस पर प्रतिबंध लगाने अड़ा हुआ है।

शुक्रवार को इंटक, एचएमएस और ऑल इंडिया भेल एम्प्लाईज यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने प्रबंधन को मोबाइल पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ऐबू के अध्यक्ष श्री गिरी ने बताया कि मैनेजमेंट सुपरवाइजर से लेकर अफसरों को मोबाइल खरीदने के लिए 2 साल में 1 बार लगभग 6000 रुपये एवं प्रतिमाह बिल के भुगतान के रूप में 500 से 1500 दे रही है जो लगभग 2 से 3 करोड़ सालाना होता है यदि मोबाइल पर प्रतिबंध लगाना थआ तो यह राशि बंद क्यों नहीं की गई।

मैनेजमेंट ने इसकी कटौती तो नहीं की अपितु बिना प्रतिनिधि यूनियन से चर्चा किये एवं बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था किये बगैर तुगलकी फरमान जारी कर दिया। आज दुनिया डिजिटल होने जा रही है और मैनेजमेंट द्वारा भेल कर्मचारियों को डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने से दूर किया जा रहा है, भेल का एम्प्लाईज पढ़ा लिखा एवं समझदार है उनके मोबाइल के उपयोग से भेल की सुरक्षा एवं प्रोडक्शन में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती है। आज भेल भोपाल के कर्मचारियों ने लगातार मेहनत एवं कठिन परिश्रम करते हुए यूनिट को न. 1 बना कर रखा है लेकिन मैनेजमेंट कर्मचारियों से छोटी-छोटी राशि छीन कर अधिकारियोंं को सुविधाएं प्रदान की जा रही है।

दूसरी ओर हेवी इलेक्ट्रिकल्स मजदूर यूनियन इंटक के अध्यक्ष आरडी त्रिपाठी ने भी भेल के कार्यपालक निदेशक को एक ज्ञापन सौंपकर कारखाने में मोबाइल पर प्रतिबंध न लगाने की मांग की है। एचएमएस यूनियन के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने भी ईडी और जीएम एचआर को ज्ञापन सौपा है।

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