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NBFC संकट का असर रियल एस्टेट पर दिखना शुरू

नई दिल्ली

एनबीएफसी क्षेत्र में नकदी की किल्लत का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखना शुरू हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तथा हाउजिंग फाइनैंस कंपनियों (एचएफसी) के बैंक क्रेडिट में बढ़ोतरी के लिए हाल में कई कदम उठाने के बावजूद मकान के खरीदारों और रियल एस्टेट डिवेलपर्स को फंड की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

समस्या इतनी गंभीर है कि अधिकतर मामलों में सैंक्शंड होम लोन का डिस्बर्सल नहीं हो पा रहा है और कई कंपनियां कंस्ट्रक्शन-लिंक्ड होम लोन स्कीम्स के तहत फंड मुहैया कराने की पहले प्रतिबद्धता जताने के बाद भी फंड मुहैया नहीं करा पा रही हैं।

दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाली कंपनी एक्सप्रेस बिल्डर्स के निदेशक पंकज गोयल ने बताया कि नकदी की किल्लत (कैश क्रंच) के कारण होम लोन की ब्याज दरें 50-75 आधार अंक (0.50 से 0.75 फीसदी) बढ़ गई हैं। डिवेलपर्स के लिए यह बढ़ोतरी लगभग 300 आधार अंक हो सकती है। एनबीएफसी अपने होम लोन अकाउंट को प्री-पेमेंट के लिए बैंकों को स्थानांतरित करने का इच्छुक है, जिससे उन्हें नकदी बनाने में मदद मिलती है।

एएसके फाइनैंशल होल्डिंग के सीईओ मनीष यादव ने बताया, ‘हालात इतने गंभीर है कि कोई भी एनबीएफसी 30-40 करोड़ रुपये की बड़ी रकम का चेक देने को तैयार नहीं है। छोटे रिटेल लोन की बात करें, तो वे ताजा लोन सैंक्शंड नहीं कर रहे हैं और पहले से सैंक्शंड लोन के लिए रकम देने को तैयार नहीं हैं।’

एनबीएफसी क्षेत्र में नकदी की किल्लत आईएलएंडएफएस समूह की कई कंपनियों द्वारा लोन की ईएमआई के भुगतान में चूक करने के बाद पैदा हुई, जिसके कारण म्यूचुअल फंड तथा अन्य वित्तीय कंपनियां कॉमर्शियल पेपर के जरिये निवेश को बंद कर दिया है। निवेश का यह जरिया एनबीएफसी को फंड जुटाने का सबसे बड़ा साधन रहा है।

एक अनुमान के मुताबिक, 50 हजार करोड़ रुपये के कॉमर्शियल पेपर का भुगतान किया जाना बाकी है, जिसके कारण बाजार में भय का माहौल पैदा हो गया है। एक नए एचएफसी के वाइस चेयरमैन दीपक जोशी ने कहा, ‘जब आपको बैंकों से पहले से कमिटेड फंड नहीं मिल पा रहे हैं, तो आप रकम को डिस्बर्स कैसे करेंगे।’

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