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पांच अफसरों को चार्जशीट देने की तैयारी

भोपाल

भेल कारखाने में लाखों रुपये की हेराफेरी में के मामले में पांच अफसरों को चार्जशीट दी जा सकती है। चर्चा है कि यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया। मामला कारखाने के एसटीएम विभाग से जुड़ा हुआ है। दरअसल विभाग के कुछ अधिकारियों ने बैगलुरु के एक सप्लायर से लाखों का सामान खरीद डाला। इस सामान की गुणवत्ता का मामला तब प्रकाश में आया जब क्वालिटी विभाग ने इसको परखा और सामान को रिजेक्ट कर दिया। यहां तक की इतना सब कुछ होने के बाद भी भेल के कम्प्यूटर के खेल में संबंधित सप्लायर को भुगतान भी कर डाला। इसको लेकर ईमानदार लोग काफी परेशान थे और उन्होंने जब इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीएमओ में शिकायत कर डाली। इस पूरे मामले में कहीं न कहीं मटेरियल मैनेजमेंट विभाग भी जांच के दायरे में आ गया है। मामला दिल्ली कारपोरेट तक पहुंच गया है। अब भेल के पांच अफसरों को भले ही बचाने की कोशिश करें लेकिन चार्जशीट देने की तैयारी शुरु हो गई है।

प्रचार में टोटका भी जारी

अपने विरोधी को अपने पक्ष में करने के लिए कुछ लोगों ने टोटका करने का काम भी शुरु कर दिया है। इसके जानकार तो इस बात को भांप लेते हैं कि यह टोटका है लेकिन अंजान आदमी टोटके का शिकार बन जाता है। चर्चा है कि गत दिवस गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र के कुछ भाजपा नेता अपने विरोधी को अपने पक्ष में काम करने के लिए उसके नरेलाशंकरी स्थित गांव पहुंच गए, जैसे ही नेता लोग वहां पहुंचे विरोधियों ने उनको चाय-नाश्ता कराया लेकिन जैसे ही उन्होंने उससे अपने घर का गुड़ लाने का कहा तो वह चौंक गया। आनन-फानन में जैसे ही उसने प्लेट में गुड़ लाया तो एक नेता अपने हाथ से उसे गुड़ खिलाने लगे, विरोधी नेता चतुर और चालाक था वह इसका मतलब भी समझ गया तो उसने गुड़ खाने से इंकार कर दिया। जब उसने वही गुड़ भाजपा नेता को खाने को कहा तो वह सकपका गया। उसने वह गुड़ खाने से साफ इंकार कर दिया। इस पर विरोधी नेता ने उनको जबरदस्त फटकार लगाके अपने घर से नौ दो ग्यारह किया।

गोविन्दपुरा क्षेत्र के प्रत्याशी बागियों से परेशान

टिकट न मिलने की खुन्नस भाजपा-कांग्रेस के बागी नेता इस विधानसभा चुनाव में निकालने की ठान चुके हैं। कहने को तो यह पार्टी के वफादार लोग हैं पर घोषित प्रत्याशियों का काम करना नहीं चाहते। अब ले देकर दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता इन्हें बड़ा पद देने का लालच देकर चुनाव प्रचार में लगाने में जुटे हुए हैं। यहां तक कि कुछ कांग्रेस नेताओं को तो संगठन में प्रदेश स्तर तक पद दे डाला। अब लोग चर्चा करने लगे हैं कि ऐसे नेता भीतरघात करेंगे या नहीं। एक नेता के हाल तो यह है कि जब उन्हें उनके एक समर्थक को टिकट नहीं मिला तो वे भाजपा का दामन थाम झंडा लेकर प्रचार में निकल पड़े और अब जब उन्हें कांग्रेस ने प्रदेश का नेता बना दिया तो वह कांग्रेस प्रत्याशी का दामन थाम प्रचार में जुट गए। कुछ यही हाल भाजपा नेताओं के भी हैं। वह भीतरघात तो हर हाल में करेंगे लेकिन परिवारवाद के खिलाफ और वंशवाद के दुश्मन कुछ नेता अपने समर्थकों को टिकट न मिलने के कारण उत्तर विधानसभा क्षेत्र में जा डटे।

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