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कब लगेगा बागची का नंबर

भोपाल

भेल के ईडी की पसंद टीसीबी के महाप्रबंधक टीके बागची कब बनेंगे जीएमआई इसको लेकर भेल के प्रशासनिक भवन में चर्चाओं का बाजार गर्म है। पहले यह कहा जा रहा था कि श्री बागची जीएमआई बनकर दिल्ली जाएंगे लेकिन हो उल्टा रहा है। पिछले दिनों दिल्ली कारपोरेट ने फेब्रीकेशन के महाप्रबंधक डीडी पाठक को जीएमआई बनाकर जगदीशपुर यूनिट भेज दिया। हालांकि वे अगले साल रिटायर भी हो जाएंगे। इधर भोपाल काडर के अधिकारी एके जैन को दिल्ली में जीएमआई बना डाला। ऐसे में श्री बागची का नंबर कब आएगा इस बात की चर्चाएं होने लगीं हैं।

वहीं महाप्रबंधक राजीव सिंह को विशाखापट्टनम यूनिट का हेड बना दिया। ऐसे में यह अटकलें भी लगने लगीं हैं कि भोपाल ईडी के लिए अगले साल श्री सिंह और जैन दावेदारी जता सकते हैं। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि बेहतर परफार्मेंस वाले अफसर को ही भोपाल यूनिट की कमान सौंपी जा सकती है। इधर इस यूनिट से महाप्रबंधक पीके सिन्हा और एम हलधर भी रिटायर होने वाले हैं। श्री पाठक को बाहर भेज दिया गया है। इसके चलते मुखिया को नए महाप्रबंधकों को काम सौंपना बड़ी जवाबदारी हो गई है।

गोविन्दपुरा में राजनीति के रंग

गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र में राजनीति के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। सतत राजनीति से जुड़े रहने के लिए यदि एक ही परिवार का एक नेता भाजपा में काम कर रहा है तो दूसरा कांग्रेस के लिये। यह देख मतदाता दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। ऐसी ही चर्चाएं दो भाजपा मंंडल के अध्यक्षों की जा रही है। चर्चा है कि अयोध्या मंडल के अध्यक्ष जहां भाजपा के प्रचार में जुटे हुए हैं तो उनके भाई अर्जुन नगर झुग्गी बस्ती में कांग्रेस का झंडा लेकर प्रचार में जुटे हैं। वहीं भाजपा अवधपुरी मंडल के अध्यक्ष भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में दिन रात मेहनत कर रहे हैं तो उनके एक रिश्तेदार खुल्लम खुल्ला कांग्रेस प्रत्याशी की जय जयकार कर रहे हैं। इस तरह के प्रचार से मतदाता को अंदर की बात देर से समझ में आ रही है। यानि कांग्रेस जीती तो भी परिवार की बल्ले-बल्ले और भाजपा जीती तो भी सोने में सुहागा। इसको लेकर कुछ भाजपाई चौक चौराहे पर चर्चा कर रहे हैं।

भेल की यूनियनों की राजनीति

कर्मचारी और मजदूरों के हित की लड़ाई लडऩे वाली भेल की कुछ यूनियनें विधानसभा चुनाव में कूद पड़ी हैं। वह कर्मचारियों को मनाने हर तरह का प्रलोभन देने से नहीं चूक रहे हैं। चर्चा है कि कर्मचारी इस राजनीति को लेकर काफी परेशान हैं। कुछ कर्मचारी तो यह भी कहने लगे हैं कि जो कर्मचारी हित की बात करेगा उसी का साथ देंगे। यह चुनाव तो दूर यूनियनों द्वारा कितना कर्मचारियों के हित में काम किया गया है उसकी भी चर्चा करने लगते हैं। आज की राजनीति पर कहीं अगले प्रतिनिधि यूनियन चुनाव में कोई असर पड़ेगा या नहीं और कर्मचारियों का भला होगा या नहीं यह अलग बात है लेकिन यूनियन के कुछ नेता जरुर अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव में पार्षद पद के दावेदार के रूप में जरुर दिखेंगे। वह राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की दमदारी देखकर ही मत देने का मन बना रहे हैं। यह बता दें कि यहां से भाजपा ने विधायक बाबूलाल गौर की पुत्रवधू को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने स्थानीय प्रत्याशी व दो बार के पार्षद गिरीश शर्मा को मैदान में उतारा है।

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