Thursday , December 13 2018
Home / भेल मिर्च मसाला / भेल में टेंडरिंग को लेकर बवाल

भेल में टेंडरिंग को लेकर बवाल

भोपाल

भेल कारखाने में टेंडरिंग प्रक्रिया को लेकर बवाल मचा हुआ है। कुछ लोगों ने तो इसकी शिकायत सिर्फ भेल के चेयरमैन को ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक कर डाली। चर्चा है कि कहने को तो टेंडर प्रक्रिया नियम के अनुूसार ही चलती है लेकिन कुछ अफसर अपने विभागों में अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर के नियम कुछ इस तरह बना देते हैं कि दूसरे कांट्रेक्टर टेंडर से खुद ब खुद बाहर हो जाते हैं। साफ जाहिर है कि टेंडरिंग के मामले में अफसरों की मर्जी के चलते अपने कांट्रेक्टर को तो भीतर कर दिया जाता है और बाकी को बाहर। लाभ-शुभ के इस खेल में चंद अफसर व कांट्रेक्टर के ही बल्ले-बल्ले हैं। मजेदार बात तो यह है कि कंटेंजेंसी के टेण्डरों में तो भारी गोलमाल किए जाने की खबर है। इसकी शिकायत परेशान लोगों ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक कर डाली। इससे भेल में बवाल मचा हुआ है। अब देखना यह है कि इन शिकायतों की ईमानदारी से जांच होती है या कुछ अफसर अपने फायदे के चलते लीपापोती करते हैं।

ईएम के साहब अब जीएम को करेंगे रिपोर्ट

भेल प्रबंधन की जितनी तारीफ की जाए कम है। पहले तो विभाग से एक महाप्रबंधक को एक मामले के चलते एचओडी पद से हटा देते हैं फिर उसे वापस मेंटेनेंस और टेक्नालाजी का काम देकर उसकी रिपोर्ट जीएम स्तर के अधिकारी को करने का फरमान जारी करते हैं। यह साहब तीन माह पहले तक विभाग के एचओडी हुआ करते थे फिर इनकी जगह अपर महाप्रबंधक स्तर के एक नए एचओडी को बैठा दिया। वह साहब तीन माह तक नए एचओडी को रिपोर्ट करते रहे। एक मामला बागसेवनिया थाने पहुंचने पर यह साहब चर्चाओं में आ गए। प्रबंधन ने इन्हें एचओडी पद से हटा दिया। यह बात साहब को नागवार गुजरी, उन्होंने आनन-फानन में नए आदेश जारी कराकर अपनी रिपोर्ट महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को करने का सपना पूरा कर लिया। लेकिन वह एचओडी आज भी नहीं बन पाए। इधर अगले साल प्रमोशन का दौर चलेगा। यह साहब अब अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक पद पर प्रमोशन कराने की पूरी कोशिश करेंगे। चर्चा है कि भोपाल में रहते हुए इनका यह सपना पूरा होगा कि नहीं इस पर सवालिया निशान लग गए हैं।

प्लांट कमेटी की आड़ में बुलाया भोज पर

भेल प्रबंधन की मंशा वह ही जानें । प्लांट कमेटी की बैठक तो हो नहीं पायी, ऐसे में एक नया रास्ता निकालकर प्रबंधन ने तीनों यूनियनों को शनिवार को सुबह दस बजे भोज पर आने का निमंत्रण दे डाला। यूनियन प्रतिनिधि भी कम चालाक नहीं हैं उन्होंने प्रबंधन की मंशा को भांप कर नंबर वन और नंबर टू यूनियनों ने प्रबंधन द्वारा कारखाने में कर्मचारियों के मोबाइल बैन और प्लांट कमेटी के आमंत्रित सदस्यों के मामले को मुद्दा बनाकर भोज का बहिष्कार कर डाला। इसके चलते तीन नंबर यूनियन भी असहाय हो गई। यूनियनों में चर्चा है कि प्रबंधन भोज की आड़ में प्लांट कमेटी के मुद्दों पर चर्चा करने का मूड बना चुकी था। फिलहाल प्लांट कमेटी की बैठक न होने से प्लांट से जुड़ी समस्याओं पर बात ही नहीं हो पा रही है। यह सब मामले उत्पादन से जुड़े हुए हैं। इस पर न तो प्रबंधन को कोई चिंता है और न ही यूनियनों को। उत्पादन को लेकर परेशान है तो ईमानदार कर्मचारी, जिसको भेल का भविष्य दिखाई देता है। वह कहने लगे हैं कि जल्द ही दोनों में तालमेल नहीं बैठा तो इसका असर टर्नओवर पर पड़ सकता है।

गोविन्दपुरा में चुनाव को लेकर कयास

चार दशक से गोविन्दपुरा से जीत का स्वाद चख रही भाजपा के लिए इस बार कांग्रेस ने मुश्किलें खड़ी कर दीं है। दरअसल कांग्रेस ने दो दशक बाद किसी स्थानीय उम्मीदवार को टिकट दे डाला। उस पर भाजपा की गुटबाजी ने कांग्रेस के पक्ष में चार चांद लगा दिए। अब इन सब बातों को लेकर गोविन्दपुरा के लोग हार-जीत के कयास लगाने लगे हैं। उस पर जहां कांग्रेसी भाजपा के खिलाफ लहर की बात कर रहे हैं तो भाजपाई महिलाओं के ज्यादा वोट पडऩे की खबर से खुश नजर आ रहे हैं। रही बात मतदाताओं की तो वह मतदान तक तो खामोश थे लेकिन अब कांग्रेस और भाजपा में कड़ी टक्कर की बात करने लगे हैं। लोग कहने लगे हैं कि क्या भाजपा के गढ़ में इस बार कांग्रेस सेंध लगा पाएगी या फिर बाबूलाल गौर का प्रभाव काम आएगा।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

मामला राजभाषा विभाग का

भोपाल राजभाषा विभाग के एक अधिकारी की मनमानी के चर्चे आम हो गए हैं। इसके …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)