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प्राकृतिक आपदाओं से हुई मौतों में भारत दुनिया में दूसरा सबसे खराब देश

नई दिल्ली

खराब मौसम की वजह से होने वाली त्रासदियों और लोगों की मौत के मामले में 2017 में भारत दुनिया में 14वें नंबर पर था। 2015 में इस मामले में भारत चौथे और 2016 में छठे नंबर पर था। इस लिहाज़ से 2017 में भारत ने अपनी स्थिति में सुधार किया था, लेकिन 2018 में भारत को इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर रखा गया है। 2013 में भारत इस मामले में तीसरे नंबर पर था, जिसके बाद से अब तक यह भारत की सबसे बुरी स्थिति है। मंगलवार को पोलैंड में हुई UN क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि भारत ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स (CRI) में दूसरे नंबर पर है।

CRI जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वजहों से किसी देश में प्रति लाख आबादी में लोगों की मौत आकंड़े से उस देश की जीडीपी को होने वाले नुकसान के विश्लेषण पर आधारित है। इस कैल्कुलेशन में बाढ़, साइक्लोन, टॉरनेडो, लू और शीत लहर से होने वाली मौतों को शामिल किया जाता है। इस साल दिए गए आंकड़ों की बात करें, तो भारत में 2017 में प्राकृतिक आपदाओं से 2,736 मौतें दर्ज की गईं, जबकि पुअर्तो रीको 2,978 मौतों के साथ इस लिस्ट में पहले नंबर पर है।

ये आंकड़े बर्लिन के स्वतंत्र संगठन जर्मनवॉच द्वारा जारी किए गए हैं। इन्हें जारी करते हुए जर्मनवॉच की तरफ से कहा गया कि CRI किसी देश में मौसम संबंधी त्रांसदियों से होने वाली मौत के बारे में बताता है। साथ ही, यह देशों को आगाह करता है कि भविष्य में ऐसे मामलों में इन देशों को और ज़्यादा तैयार रहने की ज़रूरत है।

जर्मनवॉच द्वारा जारी किए गए दस्तावेज बताते हैं कि अकेले 2017 में पूरी दुनिया में 11,500 लोगों की मौत हुई और इससे करीब 375 बिलियन डॉलर यानी 30 हज़ार करोड़ डॉलर से ज़्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ। यह आंकड़े 2017 से पहले के बरसों से मुकाबले सबसे ज़्यादा हैं। 2013 में उत्तराखंड त्रासदी की वजह से भारत की रैकिंग बहुत खराब हो गई थी। वहीं इस साल भारत के दूसरे नंबर पर होने की सबसे बड़ी वजह केरल में आई बाढ़ है।

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