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इस वजह से ‘दलाल’ क्रिश्चियन मिशेल भारत के हाथ आया?

नई दिल्ली

यूपीए के कार्यकाल में हुई अगुस्टा वेस्टलैंड चॉपर स्कैम के केंद्र में रहे बिचौलिए क्रिश्चिएन जेम्स मिशेल को मंगलवार रात को भारत लाया गया। मिशेल का प्रत्यर्पण दुबई कोर्ट के आदेश के बाद हुआ। लेकिन सूत्रों का दावा है, ‘भारत द्वारा दुबई से भागी ‘राजकुमारी’ लतिफा को वापस सौंपने को भी इस घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा सकता है।’

शेखा लतीफा, यूएई के पीएम और दुबई के राजा शेख मुहम्मद बिन राशिद अल-माकतुम की बेटी, जो इस साल के आखिर में दुबई से भाग गई थी (भागने की लगातार 7 साल की कोशिश के बाद)। वह फ्रांस अमेरिकी हर्व जुआबर्ट की बोट से गोवा तक आ गई। लेकिन तट से महज 30 मील की दूरी पर बोट को पकड़ लिया गया (बताया जाता है कि भारतीय कोस्टगार्ड ने यह काम किया)। इसके बाद उसे जबरदस्ती उसके घर पहुंचाया गया। उसके बाद से उसे न तो किसी ने देखा है और न ही किसी ने उसके बारे में कोई बात सुनी है। अपने पकड़े जाने से पहले एक विडियो में उसने कहा था, ‘अगर आप यह विडियो देख रहे हैं या तो मैं मर चुकी हूं या फिर बहुत बुरी परिस्थिति में हूं।’

लतीफा के वकीलों ने यूएन से इस मामले में दखल देले की अपील की और ‘राजकुमारी’ के गायब होने के पीछे भारत और यूएई को जिम्मेदार बताया। एमनेस्टी का आरोप है कि ‘भारत के कमांडो ने बोट पर मौजूद सभी लोगों को बंदूक की नोक पर चुप रहने को कहा और शेखा को ले गए, जबकि वह राजनीतिक शरण की मांग कर रही थी।’

सिर्फ इतना ही नहीं। भारत ने मिशेल के प्रत्यर्पण का निवेदन 19 महीने पहले किया था। वहीं यूएई ने प्रत्यर्पण की सभी कार्रवाई इसी हफ्ते पूरी की हैं। मिशेल के खिलाफ नवंबर 2015 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।

प्रत्यर्पण को लेकर इसलिए भी दिक्कत आ रही थी क्यों कि मिशेल ब्रिटिश नागरिक है और यूएई ने पहले कहा यह कहकर भारत के निवेदन को नकार दिया था कि मिशेल ब्रिटिश नागरिक है, उसे भारत को नहीं सौंपा जा सकता है। भारत और यूएई के संबंधों में गहराई आई। इसका श्रेय पीएम मोदी और यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद को जाता है। बिन जायद ने मिशेल के प्रत्यर्पण में अहम भूमिका निभाई।

बोफोर्स मामले के बाद मिशेल का भारत आना पहला मौका है जब किसी हाईप्रफाइल व्यक्ति का प्रत्यर्पण हुआ। आरोप है कि ब्रिटिश नागरिक मिशेल ने अगुस्टा वेस्टलैंड और भारत के बीच 12 वीवीआई पी हेलिकॉप्टर डील कराने के लिए भारतीय वायु सेना के अधिकारियों, ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं को 42 मिलियन यूरो (295 करोड़ रुपये) दिए।

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