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MP :: कई सांसदों के टिकट पर संकट, बदले जा सकते हैं एक दर्जन चेहरे

भोपाल,

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव की दृष्टि से प्रदेश की सभी 29 सीटों पर सर्वे और प्रत्याशी चयन का काम शुरू कर दिया है। कहां-किस सांसद की स्थिति क्या है, किसे टिकट देना है किसे नहीं, पार्टी इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। विदिशा सांसद सुषमा स्वराज ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के बेटे को टिकट देकर पार्टी ने यहां नया प्रत्याशी उतारने का संदेश दे दिया है। ऐसे हालात में विदिशा और सागर दोनों ही सीटों पर नए प्रत्याशी खड़े किए जाएंगे।

सांसद अनूप मिश्रा के भितरवार से विधानसभा चुनाव लड़ने के कारण मुरैना लोकसभा सीट भी खाली हो चुकी है। खजुराहो सांसद नागेंद्र सिंह को भी पार्टी एक बार फिर विधानसभा चुनाव में उतार दिया, जिससे खजुराहो सीट भी खाली हो गई है। सांसद मनोहर ऊंटवाल द्वारा विधानसभा चुनाव लड़ने पर देवास-शाजापुर सीट भी खाली है। फग्गनसिंह कुलस्ते, ज्ञान सिंह जैसे सांसदों को विकास पर्व के दौरान विरोध का सामना करना पड़ रहा था।

किसी आदिवासी सीट से राज्यसभा सदस्य सम्पतिया उईके को भी चुनाव को लड़ाने पर पार्टी विचार कर रही है। डॉ. भागीरथ प्रसाद का भी क्षेत्र में विरोध है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि मिशन 2019 में कई लोकसभा क्षेत्रों में एक दर्जन नए चेहरे उतारे जा सकते हैं। एट्रोसिटी एक्ट के कारण भी भाजपा को कई लोकसभा क्षेत्र में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इस कारण टिकट वितरण के जरिए सभी वर्ग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश पार्टी करेगी।

सर्वाधिक फोकस बूथ प्रबंधन पर
भाजपा सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी ने तैयारी तेज कर दी है। सभी जिलाध्यक्षों को कहा गया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के जो काम चल रहे थे, वे जारी रखे जाएं। खासतौर से ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत” और ‘बूथ जीतो चुनाव जीतो” के लिए हर बूथ के मतदाता से जीवंत सपर्क बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को कहा गया है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और नमो एप के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कई राज्यों के बूथ प्रभारी व पन्न्ा प्रभारियों से बातचीत कर चुके हैं। विधानसभा चुनाव निपटने के बाद अब मप्र के कार्यकर्ताओं से भी बातचीत करेंगे।

मोदी लहर के भरोसे जीत गए थे कई चेहरे
पार्टी नेताओं की मानें तो पिछले चुनाव में कई सांसद सिर्फ मोदी लहर के कारण जीत गए थे, जिनके बारे में इस बार हालात विपरीत बताए गए हैं। जनआशीर्वाद यात्रा से पहले पार्टी के विकास पर्व और विकास यात्रा में आदिवासी सीटों पर सांसदों को विरोध झेलना पड़ा था।

फग्गनसिंह कुलस्ते, ज्ञान सिंह जैसे सांसदों को लोगों ने गांव में घुसने नहीं दिया था। क्षेत्र में निष्क्रियता के चलते मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता के गुमशुदा होने के पोस्टर लगा दिए गए थे। बालाघाट सांसद बोधसिंह भगत और मंत्री गौरीशंकर बिसेन की लड़ाई से वहां के समीकरण बिगड़े हुए हैं। सतना सांसद गणेश सिंह के खिलाफ सवर्णों ने विरोध का मोर्चा खोला हुआ है।

पिछले चुनाव में भी वे बहुत मुश्किलों से जीते थे। इंदौर सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के क्षेत्र में भी खासी गुटबाजी सामने आई है। सीधी सांसद रीति पाठक की सीट पर भी परिवर्तन की संभावना जताई गई है। बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे की टिकट जाति प्रमाण पत्र के विवाद में बदली जा सकती है।

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