Sunday , June 16 2019
Home / भेल मिर्च मसाला / पांच अफसरों पर गिरेगी गाज

पांच अफसरों पर गिरेगी गाज

भोपाल

भेल कारखाने के कुछ विभागों में अंधा बांटे रेवड़ी, चिन्ह-चिन्ह कर खाए वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। ऐसे ही घपले घोटालों की जांच कब शुरु होती है और कब खत्म यह पता ही नहीं चल पाता। हाल ही में एक मामला कारखाने के एसटीएम विभाग का चर्चाओं में है। इस विभाग में बोरिंग टूल्स के नाम पर अपने चहेते सप्लायरों को लाखों का फायदा पहुंचाने के लिए विभाग के कुछ अधिकारियों ने लिमिटेड टेंडर के माध्यम से खरीदी कर डाली। खबर है कि इसकी शिकायत चीफ विजिलेंस कमीशन को की गई। इसको लेकर जल्द ही भेल के पांच अफसरों पर गाज गिर सकती है।

सीवीसी इसके लिए चार्जशीट देने की तैयारी कर रहा है। इसके पहले भी तीन अफसर व दो सुपरवाइजरों को चार्जशीट दी जा चुकी है। चर्चा यह भी है कि इस मामले को दबाने के लिए एक तत्कालीन ईडी अपनी पूरी ताकत लगाकर भेल के मुखिया के संपर्क में हैं। ऐसे में विजिलेंस कैसे जांच पूरी कर पाएगी इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। प्रशासनिक भवन में अफसर कहने लगे हैं कि भेल के मुखिया निष्पक्ष जांच करा पाएंगे कि नहीं।

कोलकाता भेज रहे हैं दागी अफसर

भेल प्रबंधन की जितनी तारीफ की जाए कम है। कम्पनी को कैसे आगे बढ़ाया जाए इसको लेकर भोपाल यूनिट से कुछ अफसरों को ज्ञान प्राप्त करने कोलकाता ट्रेनिंग के लिए भेजा जा रहा है। एक अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को यहां से ट्रेनिंग के लिए भेज तो दिया लेकिन प्रबंधन ने यह पता लगाने की जरुरत ही नहीं समझीं कि यह अफसर विजिलेंस की दागी अफसरों की सूची में है। कारखाने के स्क्रेप डिस्पोजल विभाग में काम कर रहे यह अफसर कुछ मामलों में जांच के दायरे में हैं। ऐसे में यह कहा जाने लगा है कि यह ट्रेनिंग पाकर कम्पनी को कैसे आगे बढ़ाएंगे और फायदा पहुंचाएंगें लेकिन इन सब बातों से स्थानीय प्रबंधन को कोई मतलब ही नहीं है। दूसरी ओर ईएम विभाग में भी मनमानी का आलम जारी है। एक तो आर्डरों की कमी उस पर प्रोडक्शन में देरी किसी के गले नहीं उतर रही। विभाग के कर्मचारी कहने लगे हैं कि यहां के साहब काम नहीं संभाल पा रहे हैं। उस पर साहब के चहेते अफसर को एमएम का काम सौंप दिया है। ऐसे में भगवान ही मालिक है इस विभाग का।

सोलर प्लांट की उम्मीदें जागीं

भेल प्रशासन ने करोड़ों रुपए खर्च करने का मन बनाकर भेल के जम्बूरी मैदान पर सोलर प्लांट लगाने का काम भी शुरु कर दिया था लेकिन प्रदेश की सरकार ने इस जम्बूरी मैदान पर ऐसा कब्जा किया कि कलेक्टर को इस सोलर प्लांट स्थापना के लिए मनाही करना पड़ी। इसको लेकर भेल कर्मचारियों ने काफी विरोध किया लेकिन प्रदेश सरकार की दादागिरी के चलते किसी की नहीं चली। देर आए दुरुस्त आए कांग्रेस सरकार आते ही यहां के लोगों की उम्मीदें जाग गई हैं। अब चर्चा होने लगी है कि जम्बूरी मैदान में जल्द ही सोलर प्लांट लगेगा। फिलहाल तो भाजपा की तरह कांग्रेस की नई सरकार इसी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन 17 दिसम्बर को करने जा रही है। ऐसे में भेल कर्मचारियों में भी चर्चाएं होने लगीं है कि शायद प्रदेश के नए मुखिया यदि सोलर प्लांट लगाने की घोषणा कर दें तो सोने में सुहागा होगा।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

तौरानी की हो सकती है रवानगी

भोपाल भेल भोपाल यूूनिट में पिछले साल महाप्रबंधक थर्मल बने एमएल तौरानी की अपने विभाग …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)