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भेल के सीएमडी को एक्सटेंशन मिलने की अटकलें

भोपाल

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर को दो साल का एक्सटेंशन मिलने की अटकलें जारी हैं। दरअसल वह जून 2019 में रिटायर होने वाले हैं और उनकी जगह नए चेयरमैन का चयन भी हो चुका है। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि वर्तमान चेयरमैन एक तो भेल से जुड़े हुए हैं दूसरा उनके पास अनुभव की कमी नहीं है, ऐसे में नए चेयरमैन के चयन पर वर्तमान चेयरमैन भारी पड़ सकते हैं। इसके लिए मंत्रालय से लेकर पीएमओ तक फाइल चल रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नए सीएमडी को अभी तक 50 हजार करोड़ सालाना का टर्न ओवर करने वाली कंपनी का अनुभव नहीं है, जबकि सोबती के पास है। श्री सोबती ने कम्पनी का प्राफिट व रेटिंग भी बढ़ाया है। यही नहीं कम्पनी की सोच को बदलकर नई दिशा भी दी है। इसी के चलते ऐनवक्त पर वर्तमान सीएमडी के कार्यकाल को बढ़़ाने का फैसला लिया जा सकता है, यदि शिवसेना आड़े न आए। इस मामले को लेकर कयासों का दौर चल रहा है। चर्चा यह भी है कि पूर्व में चेयरमैन पद के लिए प्रकाशचंद का चयन हो चुका था और ऐनवक्त पर पूर्व चेयरमैन बीपी राव को दो साल का एक्सटेंशन मिल गया था। इसलिए कुछ भी हो सकता है।

नए साल में कहेंगे अलविदा भेल

सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कम्पनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के कई अधिकारी नए साल में कम्पनी को अलविदा कहेंगे। ऐसे में कम्पनी को अनुभवी अधिकारियों की कमी काफी खलेगी। वर्ष 2019 में भेल के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल सोबती, डायरेक्टर मानव संसाधन डी बंदोपाध्याय, भोपाल के ईडी डीके ठाकुर, ईडी झांसी डीके दीक्षित, कारपोरेट के ईडी द्य के पुरुस्वानी और सर्वेश चतुर्वेदी के अलावा कई महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी रिटायर होंगे। यूं तो रिटायर होने वाले की कम्पनी में एक लंबी फेहरिस्त है लेकिन नए अफसरों को भी प्रमोशन देकर नवाजा जा सकता है। इनमें भोपाल कैडर के अफसर राजीव सिंह, एके जैन, टीके बागची को भी किसी बड़ी यूनिट में काम करने का मौका मिल सकता है। इधर कुछ अफसर भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों के रिटायरमेंट की अवधि 62 साल किये जाने की चर्चाओं के चलते काफी खुश नजर आ रहे हैं। यही नहीं वह पीएमओ तक अपनी पहुंच लगाकर इस बात का सच जानने की कोशिश में लगे हुए हैं। लेकिन ऐसा होगा कि नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता।

वेज रिवीजन की बाजीगरी

भेल के कर्मचारी व अधिकारी के लंबित वेज रिवीजन की मांग को लेकर कुछ यूनियनों के नेता बाजीगरी दिखा रहे हैं। इसको लेकर आए दिन धरने प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं। दूसरी ओर भेल कारपोरेट इन नेताओं पर पूरी तरह नजर रखे हुए हैं। चर्चा है कि यदि यह वेज रिवीजन समय पर नहीं हुआ तो नेताओं की नेतागिरी खतरे में पड़ जाएगी। प्रबंधन यूनियनों को ठेंगा दिखा रहा है तो समय पर प्रबंधन अपने फैसले में यूनियनों की भागीदारी भी करने से कतरा रहा है। यह पहला मौका है कि चुनी हुई प्रतिनिधि यूनियनें अपने आपको असहाय महसूस कर ही है। कर्मचारी कहने लगे हैं कि आखिर हमारे हक के लिए यह यूनियनें प्रबंधन के सामने कब तक झुकती रहेंगी। एचएमएस, केटीयू, बीएमएस और एटक यूनियनें हारने के बाद अपना पूरा दम क्यों नहीं दिखा पा रही हैं।

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