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पूर्व PM शास्त्री के पोस्टमॉर्टम पर RTI से खुलासा

वाराणसी

सादगी की प्रतिमूर्ति और काशी के लाल कहे जाने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भारत सरकार के पास नहीं हैं। चौंकाने वाला यह खुलासा प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक आरटीआई के जवाब में किया है। चंदौली जिले के संतोष कुमार पाठक की ओर से लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में हुई मौत के कारणों को जानने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की मांग की गई थी। पाठक की आरटीआई के जवाब में पीएमओ ने यह चौंकाने वाली जानकारी दी।

काशी में पैदा हुए लाल बहादुर शास्त्री की मौत के रहस्य को जानने के लिए पीएमओ से आटीआई के जरिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मांगने वाले संतोष कुमार पाठक ने यह जानकारी एनबीटी के साथ साझा की है। उनका कहना है शास्त्री जी की मौत से पर्दा हटाने के लिए उन्होंने यह आरटीआई दाखिल किया था, लेकिन इस मामले में पीएमओ की ओर से मिली जानकारी के बाद उनके हाथ निराशा लगी है।

गौरतलब है पाकिस्तान से 1965 के युद्द के बाद जब रूस के ताशकंद में दोनों देशों के प्रधानमंत्री समझौते के लिए पहुंचे, तब समझौते के बाद उसी रात को लाल बहादुर शास्त्री की मौत हो गई। जिस रात उनकी मौत हुई उस रात खाना खाने के दौरान तक वह एकदम ठीक थे। अचानक उनकी मौत के पीछे क्या कारण था? यह जानने की कोशिश में पीएमओ से मिले जवाब के बाद आरटीआई कार्यकर्ता संतोष पाठक मायूस भी है।

पाठक ने कहा, ‘हमने किताबों में पढ़ा था कि शास्त्री जी को उस रात उनके साथ गए घरेलू नौकर और रसोइये के बजाए रूस में भारत के राजदूत व नेहरू परिवार के अत्यंत करीबी रहे टीएन कौल ने खाना खिलाया था।’ उन्होंने बताया, ‘बाद में शास्त्री जी के रसोइये जान मुहम्मद को केजीबी (रूस की जांच एजेंसी) ने खाने में जहर मिलाने के शक में पकड़ा भी था, फिर अचानक से वो जांच बाद में बंद कर दी गई।’ उनका कहना है कि शास्त्री जी की मौत के पीछे अब मुझे राजनीतिक षड्यंत्र की बात इसीलिए और ज्यादा सही लगती है क्यूंकि भारत सरकार के पास उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक नहीं है।

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