Tuesday , January 22 2019
Home / भेल न्यूज़ / आठ करोड़ की बिजली चोरी करा हर माह 65 लाख यूनिट बिजली खरीद रहा है भेल

आठ करोड़ की बिजली चोरी करा हर माह 65 लाख यूनिट बिजली खरीद रहा है भेल

बिजली चोरी रोकने भेल प्रशासन के पास नहीं है ठोस योजना

भोपाल

बिजली उपरकण बनाने वाली महारत् न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड(भेल)भोपाल यूनिट की भी गजब कहानी है। कारखाने के लिए कुछ हद तक अपने जनरेटर सेटों से बिजली तो बना रहा है लेकिन टाउनशिप में करीब 8 करोड़ की सालाना बिजली चोरी कराकर मप्र विद्युत वितरण कंपनी से करीब 65 लाख यूनिट बिजली खरीद रहा है। टाउनशिप की बिजली चोरी रोकने के लिए उसके पास कोई ठोस योजना ही नहीं है। पहले करोड़ों खर्च कर इसे रोकने स्काडा सिस्टम जरूर लेकिन देखते ही देखते यह सिस्टम भी फेल हो गया।

रही बात मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और प्रदेश सरकार की तो वह बिजली चोरी रोकने के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। भेल का भी एक ही रोना है कि टाउनशिप की झुग्गी बस्ती में इसे रोकने के लिए जिला, पुलिस और स्थानीय बिजली विभाग के अमले के बिना मुश्किल है। एक अनुमान के मुताबिक टाउनशिप में करीब 20,000 से ज्यादा झुग्गियां अवैध रूप से बनी है। उस पर नेताओं की शह पर नयी-नयी झुग्गियां बनती जा रही हैं।

इन लोगों ने भेल के बिजली के तार से सीधे लाईन जोड़ रखी है। इससे भेल टाउनशिप में झुग्गी बस्तियों में सालाना करीब 8 करोड़ रुपए की बिजली मुफ्त में खर्च हो जाती है, जो भेल द्वारा खरीदी जा रही कुल बिजली का करीब एक तिहाई हिस्सा है। भेल विद्युत विभाग ने टाउनशिप में झुग्गी बस्तियों को बिजली देना बंद कर दिया है, बावजूद इसके भेल को करीब 8 करोड़ सलाना का नुकसान उठाना पड़ता है। भेल प्रशासन को बिजली चोरी रोकनें में जिला व भेल प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पा रहा हैं। चोरी का कारोबार नेताओं के संरक्षण में फल-फूल रहा हैं।

भेल टाउनशिप में अन्ना नगर, बंगाली कालोनी व सिविल आफिस के पीछे (हबीबगंज), भेल कालेज के पीछे, एकता नगर (बरखेड़ा), मस्जिद के पीछे, 40 क्वाटर, 50 क्वाटर, 60 क्वाटर और 100 क्वाटर (पिपलानी), आजाद नगर और विकास नगर जैसी करीब दो दर्जन से ज्यादा झुग्गी बस्तियां बनी हैं, जिनमें तकरीबन 20,000 लोग निवास करते हैं जिसमें से सबसे ज्यादा बिजली खपत अन्ना नगर में है। इसके बाद हबीबगंज और पिपलानी का नंबर आता है। हालांकि भेल विद्युत विभाग ने कुछ झुग्गियों में दिन में विद्युत कटौती शुरू कर दी है, जिससे भेल की मुफ्त में जल रही बिजली में कुछ कमी तो आएगी, लेकिन फिर रात में इन झुग्गियों में मुफ्त जलने वाली बिजली से सालाना 8 करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना तो भेल को लगेगा ही।

फिजूल खर्ची की हद पार कर दी
एक दशक पूर्व भेल प्रशासन ने बिजली चोरी रोकने के लिए आनन-फानन में करोड़ों रुपए खर्च कर बिजली चोरी रोकने के लिए टाउनशिप के बरखेड़ा में स्काडा सिस्टम शुरू किया था, लेकिन यह सिस्टम कुछ समय में ही फेल हो गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे फिर से शुरू करने की जरूरत ही नहीं समझी। हालांकि शुरू में भेल के बिजली अमले ने इसके लगते ही काफी कुछ बिजली चोरी रोकने की कोशिश की थी। भेल प्रशासन आज भी करोड़ों की बिजली चोरी रोकने कोई ठोस योजना नहीं बना पा रहा है।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

गोविन्दपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में करोड़ों का कारोबार, मौन है सरकार

भोपाल गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र को आर्दश औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के प्रयास …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)