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दुबई से राहुल का वार, मोदी सरकार के दौरान बढ़ा भारत में गुस्सा

नई दिल्ली,

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्र की मोदी सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात दौरे के दौरान भी उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा. सरकार पर बरसते हुए दुबई में शनिवार को राहुल गांधी ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत में असहिष्णुता और गुस्सा बढ़ा है और यह सत्ता में बैठे लोगों की मानसिकता की उपज है. वह 2 दिन की संयुक्त अरब अमीरत (यूएई) की यात्रा पर हैं. यात्रा के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि भारत लोगों पर एक विचारधारा नहीं थोपता बल्कि अनेकों विचारों को आत्मसात कर सकता है.

राहुल गांधी ने आईएमटी दुबई विश्वविद्यालय के छात्रों से बातचीत में कहा, ‘भारत ने विचारों को गढ़ा है और विचारों ने भारत को गढ़ा है. अन्य लोगों को सुनना भी भारत का विचार है.’ कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत ‘भूख’ जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में देश में खेल को नंबर एक की प्राथमिकता देना कठिन है. कांग्रेस अध्यक्ष ने शुक्रवार को यहां संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मख्तूम से मुलाकात की और भारत तथा यूएई के बीच के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चा की थी.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘सहिष्णुता हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन हमने पिछले साढ़े चार वर्षों में बहुत सा गुस्सा और समुदायों के बीच खाई देखी है. यह सत्तापक्ष में बैठे लोगों की मानसिकता से उपजा है.’ उन्होंने कहा, ‘हम एक ऐसा भारत पसंद नहीं करेंगे जहां पत्रकारों को गोली मार दी जाती है, जहां लोगों की हत्या इसलिए कर दी जाती है क्योंकि उन्होंने अपनी बात रखी. ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें हम बदलना चाहते हैं, आने वाले चुनाव में यही चुनौती है.’

अपनी खेल की गतिविधियों के बारे में राहुल ने कहा, ‘मैं हमेशा खेल या खेल से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहा हूं. जब मैं युवा था तो ताइक्वांडो, कराटे और तैराकी में हिस्सा लेता रहता था. अभी मैं अकीडो करता हूं. इस खेल में मैं ब्लैक बेल्ट हूं. मैं रोजाना दौड़ता हूं. मैं कॉलेज के दिनों में मुक्केबाजी और फुटबॉल खेला करता था.’

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक परिदृष्य में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास इस ग्रह का सबसे बड़ा जेनेटिक संसाधन है और अगले 10 से 15 वर्ष में उपचार और चिकित्सा स्वास्थ्य का यही स्वरूप होने वाला है. ब्रेन ड्रेन 20वीं सदी का विचार है. 21वीं सदी में लोग ज्यादा गतिमान हैं और उन्हें जहां अवसर मिलते हैं वे वहां चले जाते हैं. व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि आपका देश अवसर मुहैया कराता है.’

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