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अंतरिम बजट 2019 में कम होगा आपका टैक्स?

नई दिल्ली

नरेंद्र मोदी सरकार का पहला बजट ‘अच्छे दिन’ के रूप में देखा गया था। उस बजट में टैक्स छूट का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ 80C के तहत टैक्स छूट की सीमा भी बढ़ाई गई थी। हालांकि, उसके बाद के बजट में वैसी उदारता नहीं देखी गई। हालांकि, बाद के बजटों में करदाताओं को कुछ और टैक्स छूट दिए गए, लेकिन कुछ टैक्स बेनिफिट्स छीन लिए गए या अतिरिक्त टैक्स लगा दिए गए।

उदाहरण के तौर पर 2015 का बजट अतिधनाढ्य वर्ग के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा। 1 करोड़ रुपये से ऊर की सालना आय पर 10% का सरचार्ज बढ़ाकर 12% से लेकर 15% तक कर दिया गया। 2018 के बजट में तो शेयरों में निवेश से प्राप्त 1 लाख से ज्यादा रकम पर 10% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स लगा दिया गया था।

पिछले वर्ष ही मोदी सरकार ने वेल्थ टैक्स खत्म कर दिया और जिन वेतनभोगियों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) नहीं मिलता है, उनके लिए 80GG के तहत टैक्स छूट की सीमा प्रति माह 2 हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये कर दी थी।

चूंकि इस बार अंतरिम बजट के महीने-दो महीने बाद ही आम चुनाव है, इसलिए मोदी सरकार से टैक्स पर राहत दिए जाने की उम्मीद की जा रही है। कहा जा रहा है कि सरकार मध्य वर्ग के करदाताओं को टैक्स पर बड़ी छूट देकर लुभाने की कोशिश करेगी। खबरों में सेविंग्स पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने, पेंशनभोगियों को छूट देने और हाउसिंग लोन रेट्स पर बड़ी राहत दिए जाने पर मंथन की बात कही जा रही है।

क्या ये उम्मीदें तार्किक हैं? इसके जवाब में इतना तो कहा जा सकता है कि सेक्शन 80C के तहत निवेश पर टैक्स छूट की 1.5 लाख रुपये की मौजूदा सीमा की समीक्षा होनी चाहिए क्योंकि इसमें 10 साल के बाद 2014 में ही बदलाव हुआ था। सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में इतने तरह के निवेश आते हैं कि इसे 1.5 लाख तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं जान पड़ता है। अगर आप नैशनल पेंशन स्कीम (NPS) में निवेश की अतिरिक्त सीमा पर भी विचार करें तो भी टैक्स छूट का दायरा 2 लाख रुपये तक ही पहुंचता है। अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार 80C की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये और NPS की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करेगी।

इनके अलावा, इस बजट से बेसिक इग्जेंप्शन लिमिट (टैक्स छूट की न्यूनतम आय सीमा) में वृद्धि की उम्मीद भी की जा रही है। लेकिन, इससे जहां हर श्रेणी के करदाताओं को फायदा होगा, लेकिन सरकारी खजाने को नुकसान होगा। अनुमान के मुताबिक, अगर सरकार टैक्स छूट की न्यूनतम सीमा 10 हजार रुपये बढ़ा दे तो सरकारी खजाने में 2 हजार करोड़ रुपये कम टैक्स आएंगे।

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