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वाष्र्णेय और तेलंग की वापसी की अटकलें

भोपाल

पिछले साल ही भोपाल यूनिट से अपर महाप्रबध्ंाक से महाप्रबंधक पद पर प्रमोशन पाकर रानीपेट गये रूपेश तेलंग और झांसी यूनिट पहुंचे श्री वाष्र्णेय की भोपाल वापसी की अटकलें लगाई जाने लगी है। आनन-फानन में प्रमोशन मिलने से कार्पोरेट के आदेश के पालन में इन्हें तबादले पर तो जाना ही था लेकिन इनका दिल आज भी भोपाल यूनिट में ही लगा हुआ है, उस पर इस यूनिट के महाप्रबंधक फीडर्स ग्रुप के महाप्रबंधक एम हलदर, पीएमजी के जीएम आरके आर्या, ईएम ग्रुप के महाप्रबंधक एचके निगम, एससीआर इंजीनियरिंग, एमएम की महाप्रबंधक नीलम भोगल एससीआर के महाप्रबंधक के माथुर और क्वालिटी के महाप्रबध्ंाक एमएस किनरा का इस साल रिटायर होना तेलंग और वाष्र्णेय की वापसी के लिए मील का पत्थर साबित होगा। देर आये दुरूस्त आये लेकिन घर वापस आयेंगे।

एफपीएम के डिप्टी साहब के जलवे

विजिलेंस गाईड लाइन की धज्जियां उड़ाते हुए फेब्रीकेशन ग्रुप के (गढ़ाई)के एक डिप्टी मैनेजर के जलवे है। एक तो सात साल से एक ही विभाग में जमें उस पर विभाग प्रमुख ने डिप्टी साहब को वक्र्स कॉन्ट्रेक्ट की बड़ी जवाबदारी सौंपी दी। ऐसे में जो ठेकेदार डिप्टी साहब का सेवा सत्कार और जी हुजूरी नहीं करता समझों ठेकेदारी से बाहर। जो ठेकेदार डिप्टी साहब की गुडविल में समझों मजदूरों को समय पर वेतन या बोनस नहीं भी मिले तो उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती। यहां के मजदूरों को आज तक दीपावली बोनस तक नहीं बांटा गया है। चर्चा है कि फेब्रीकेशन ग्रुप की कमान तेज तर्रार महाप्रबध्ंाक को सौंप दी गई है तो ऐसे में वर्षों से जमें डिप्टी साहब जैसे अफसरों पर क्या कार्यवाही होगी, इस पर सबकी निगाहें होगी।

मामला भेल कारखाने के कारपूल का

चर्चा है कि भेल कारखाने कार-बस पूल भी अपने आप में कम महत्वपूर्ण नहीं है। सरकारी दर पर यहां पर कार और बस चलाने के टेंडर करोड़ों से कम नहीं है। चर्चा है कि कार की रीङ्क्षडग 100 किमी से कब 200 किमी हो जाये यह करिश्मा तो इस विभाग का एक ई-1 स्तर का अधिकारी ही करते नजर आयेगा। वह भी कब जब उसके मिलने वाले की दुकान से ठेके पर लगी कार कंपनी टायर खरीदे चाहे वह कार के हों या बस के हों। खबर है कि पहले उनकी खुद टायर की दुकान थी जो अब किसी और दुकान में मर्ज कर ली। उस पर जीएम एचआर के खास होने का दम भरने की बात यह ई-1 कर्मचारी-यूनियन नेताओं से करते नजर आयेंगे। ऐसे में कौन इस पर हाथ डाले यह सोचने की बात है।

फिर गमायेगा यूनिफार्म का मामला

भेल में एनटीपीसी-ओएनजीसी के पेटर्न पर वेज रिवीजन तो हो नहीं पाया उस पर भेल ने कर्मचारियों के लिए यूनिफार्म देने का टेंडर कर डाला। यूं तो कंपनी देश की नामी गिरामी कंपनियों से यूनिफार्म खरीदने के लिए प्रतिनिधि यूनियनों की सहमति से यूनिफार्म खरीदने का काम करती रही है, लेकिन इस बार किसका जादू चला कि प्रबध्ंान स्माल इंडस्ट्रीज के माध्यम से यूनिफार्म खरीदने तैयार हो गई। कर्मचारी कहने लगें है कि प्रबंधन के इस राज का पर्दा फाश करने फिर बड़े आंदोलन की राह तलाशनी पड़ेगी।

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