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2019: ‘वोट कटवा’ से गठबंधन को मात देने की तैयारी

लखनऊ

2019 लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा के बीच सूबे में ‘वोट कटवा’ पार्टियां अब फोकस में हैं। हालांकि इनमें से अधिकतर पार्टियां ऐसी हैं जिनके पूर्व में बीजेपी से सम्बंध अच्‍छे नहीं रहे हैं। ऐसे में अब इन दलों पर कांग्रेस ने नजरें गड़ा ली हैं। उधर, कुछ नए दलों पर बीजेपी की भी निगाह बनी हुई है।

दरअसल, एसपी और बीएसपी ने ऐतिहासिक गठबंधन के तहत यूपी में कुल 80 लोकसभा सीटों में से 78 पर अपने प्रत्‍याशी उतारने का फैसला लिया है। इसके अलावा गठबंधन ने दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी हैं। ये सीटें रायबरेली और अमेठी की हैं।

उधर, अपेक्षित सीटें न मिलने की वजह से कांग्रेस अब छोटे-छोटे दलों को मिलाकर ऐंटी एनडीए और ऐंटी एसपी-बीएसपी गठबंधन तैयार करने की दिशा में प्रयास कर रही है। ऐसे में उसने इन वोट कटवा और अनुभवहीन दलों को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश की है। हाल ही में कांग्रेस के महासचिव गुलाम नबी आजाद सभी 80 लोकसभा सीटों पर उम्‍मीदवार उतारने संबंधी संकेत दे चुके हैं।

राजभर और अनुप्रिया दिखा चुके हैं बागी तेवर
यूपी में वोट कटवा दलों में राष्‍ट्रीय लोकदल (आरएलडी), सुहेलदेव बहुजन समाज पार्टी (एसबीएसपी), निषाद पार्टी, अपना दल के दोनों विरोधी धड़े, एसपी के बागी नेता शिवपाल सिंह यादव की नई पार्टी पीएसपी और पीस पार्टी शामिल हैं। एसबीएसपी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर यूपी की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं पर समय-समय पर वह अपनी ही सरकार की आलोचना करते रहते हैं। इसी तरह अपना दल की तरफ से केंद्र सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल भी कह चुकी हैं कि वह योगी सरकार के आधिकारिक कार्यक्रमों का तब तक बहिष्‍कार करती रहेंगी जब तक उनकी पार्टी को लोकसभा चुनावों में पर्याप्‍त सीटें नहीं दी जाएंगी।

निषाद पार्टी पर बीजेपी नेताओं की नजर
इधर, निषाद पार्टी पर बीजेपी नेताओं की नजर है। गोरखपुर में करीब चार लाख निषाद मतदाता हैं जिन्‍होंने पिछले साल मार्च में हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी प्रत्‍याशी को हराने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पूर्व में एसपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी निषाद पार्टी लोकसभा चुनाव में किसी बड़ी पार्टी के सहयोग से उतरना चाह रही है।

कांग्रेस आरएलडी, एसबीएसपी और पीस पार्टी के संपर्क में
आरएलडी के प्रमुख अजित सिंह को एसपी-बीएसपी ने अपने गठबंधन में नहीं शामिल किया। वह पश्चिमी यूपी की करीब आधा दर्जन सीटों पर अपने प्रत्‍याशी उतारने की मांग कर रहे थे। ऐसे में कांग्रेस आरएलडी के संपर्क में तो है ही, एसबीएसपी और पीस पार्टी के नेताओं से भी बातचीत कर रही है। कांग्रेस ऐसे दलों का गठबंधन बनाना चाहती है जिनका प्रभाव क्षेत्र भले ही कम इलाकों में हो पर उनके मतदाता चुनाव में हार-जीत के बीच निर्णायक भूमिका निभा सकें।

बीजेपी से इतर पार्टनर की तलाश में छोटे दल
गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने भी छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन किया था और जबरदस्‍त सफलता हासिल की थी। अब इन छोटे दलों को लगता है कि बीजेपी ने उनके साथ जो वादा किया था उसे निभाने में वह नाकामयाब रही है। ऐसे में वह एक बार फिर किसी नए और बड़े पार्टनर की तलाश में हैं।

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