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…और साहब विदेश यात्रा पर

भोपाल

बड़े साहब के खास एक विभाग के साहब को भले ही दो विभाग दे दिये हो लेकिन उनके बल्ले-बल्ले है। कॉपर सप्लायरों के एक लॉबी छोटे साहब पर इतनी खुश है कि उन्हें विदेश यात्रा पर भिजवाने में काफी मदद कर डाली। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि इन साहब को विदेश यात्रा कराने के बाद उन्हें एक विभाग और दिलवाने में कॉपर सप्लायरों की अहम भूमिका रही है। मजेदार बात यह है कि पहले विभाग में भी कॉपर खरीदी की भरमार है तो दूसरे विभाग में भी पहले विभाग से कम नहीं। यह बात भेल के कुछ अफसरों को रास नहीं आ रही है। वह कहने लगेे हैं कि बड़े साहब को छोटे साहब से ऐसी क्या मोहब्बत है कि वह उन्हें हर तरह की मदद कर रहे हैं। खैर विदेश यात्रा के बाद नये विभाग का अतिरिक्त काम मिलना किसी को रास नहीं आ रहा है।

प्रमोशन की जुगत में एजीएम साहब

लंबे समय तक भोपाल यूनिट में रहते हुए एक अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को भले ही प्रमोशन नहीं मिल पाया हो लेकिन भेल की जगदीशपुर यूनिट पहुंचने के बाद वह हर हाल में अपना प्रमोशन कराने की जुगत में हैं। हालांकि यह प्रमोशन के हकदार तो हैं लेकिन भोपाल में रहते हुए सुरा का शौक इनके प्रमोशन में मुश्किलें पैदा करता है। चर्चा है कि एजीएम साहब ने जगदीशपुर यूनिट ज्वाइन करने के बाद इस शौक को काफी हद तक कम कर दिया है। इसके चलते लोग कहने लगे हैं कि उनका प्रमोशन इस यूनिट में संभव है। वह प्रमोशन के बाद यहां के मुखिया भी बन सकते हैं लेकिन उनक ा भोपाल आने का मोह कहीं फिर से उनके प्रमोशन पर पानी न फेर दें।

मामला चेयरमेन के एक्सटेंशन का

भेल के चेयरमेन व मेनेजिंग डायरेक्टर के दो साल के एक्सटेंशन का मामला चर्चाओं में है। प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी यह तो कहने लगे हैं कि चेयरमेन साहब ने कंपनी को घाटे से उबार कर फायदे में तो ले आये इसलिए ज्यादातर यूनियनों की मंशा उन्हें एक्सटेंशन की पक्षधर बनाये हुए है लेकिन जिन नये चेयरमेन साहब का बोर्ड ने सिलेक् शन किया हैं उनका क्या होगा। यूं तो पहले भी दो चेयरमेन का सिलेक् शन तो हो गया लेकिन एनवक्त पर सरकार ने पुराने को ही एक्सटेंशन दे डाला। ऐसे में चर्चा है कि यह चेयरमेन साहब भी दो साल का एक्सटेंशन लेने में सफल हो जायेंगे। मामला पैचिदा इसलिए बन गया है कि विभाग केे केन्द्रीय मंत्री शिव सेना के हैं और एक्सटेंशन का मामला पीएमओ पहुंच गया है। इसी माह फैसला होने की उम्मीद है।

कारखाने में मन्ने-मन्ने का वायरस

उत्पादन के अंतिम समय में भेल कारखाने में मन्ने-मन्ने की चर्चाएं हैं। एक नेताजी ने एक अफसर से पूछा कि हर ब्लाक के कर्मचारी मन्ने-मन्ने कर रहे हैं आखिर यह है क्या। तब अफसर ने खुलकर कहा कि नेताजी दरअसल उत्पादन के पीक पीरियड में मटैरियल की कमी पड़ गई है इसलिये एमएनए यानि मटैरियल नॉट एवलेबिल की बैठकों को मन्ने-मन्ने कह रहे हैं। किसी भी तरह जल्द मटैरियल बुलाकर पुराने आर्ड 31 मार्च तक खत्म करने के मूड में दिखाई दे रहे हैं। अब चिन्ता इस बात की है कि मन्ने-मन्ने (एमएनए) के बाद भी क्या इस वित्तीय वर्ष में 3600 का आंकड़ा पार कर पाएंगे?

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