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भारत की कूटनीतिक कामयाबी,, मसूद पर बैन का प्रस्ताव लाएंगे फ्रांस-UK-US

नई दिल्ली,

पाकिस्तान के खिलाफ भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है. दुनिया के तीन ताकतवर देश अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाएंगे. पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव बनाया है. हमले के बाद कई देश भारत का समर्थन कर चुके हैं. पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की जैश ने जिम्मेदारी ली थी. जैश का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में छिपा बैठा है. हमले के 6 दिन बाद चुप्पी तोड़ते हुए पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने भारत से सबूत मांगा था. इमरान खान ने इस कायराना हमले की निंदा तक नहीं की.

सूत्रों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में फ्रांस संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगवाने के लिए प्रस्ताव लाएगा. यह दूसरा मौका होगा जब फ्रांस संयुक्त राष्ट्र में ऐसे किसी प्रस्ताव के लिए पक्ष बनेगा. 2017 में अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति 1267 में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश के प्रमुख मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी. इस प्रस्ताव पर चीन ने अड़ंगा लगा दिया था.

फ्रांस के इस फैसले पर फ्रांस के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार फिलिप एतिन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच मंगलवार सुबह ही बातचीत हुई थी. इस दौरान पुलवामा हमले को लेकर गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए फ्रांसीसी कूटनीतिज्ञ ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देशों को अपने कूटनीतिक प्रयासों में समन्वय करना चाहिए. पुलवामा हमले के 100 घंटे के भीतर भारत ने हमले को अंजाम देने वाले जैश के 3 आतंकियों को ढेर कर दिया था. हालांकि इस एनकाउंटर में भारत को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. इस मुठभेड़ में सेना के मेजर समेत चार जवानों को शहादत देनी पड़ी.

बता दें कि पुलवामा हमले के एक दिन बाद भारत ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम शुरू कर दी थी। विदेश सचिव विजय गोखले ने दिल्ली में करीब दो दर्जन राजदूतों से मुलाकात की। भारत ने पाकिस्तान से सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा भी वापस ले लिया। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि एमएफएन का दर्जा वापस लेने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर होगा।

पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद द्वारा की गई हरकत पर सरकार पूरी तरह से बदले के मूड में है और आतंकी गतिविधियों में पाकिस्तान की मिलीभगत की पोल खोलकर उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया जा रहा है। सरकार अपनी रणनीति के तहत देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर सबको अपने विश्वास में लेना चाहती है ताकि इस घटना का सैन्य स्तर पर मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

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