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शहीद पिता को मुखाग्नि देते बेटे के मुंह से निकला ‘पापा जा रहे’

मेरठ

आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में शहीद हुए मेरठ के बसी टींकरी गांव के जवान अजय कुमार के ढाई साल के बेटे आरव ने भीगी आंखों से मंगलवार को जैसे ही अपने पिता को मुखाग्नि दी, तब हजारों आखें नम हो गईं। अंत्‍येष्‍टि में उमड़े जनसैलाब में आरव के लिए ‘रो मत बेटा, तुम्हें भी देश की रक्षा करनी है’ सदाएं गूंजती रहीं। ‘अजय कुमार अमर रहें’ के नारे लगते रहे। इस दौरान आरव के मुंह के निकला ‘पापा जा रहे’।

आरव ने मंगलवार को शहीद पिता के पार्थिव शरीर के घर आने के तिरंगे में लिपटे अपने पिता का चेहरा देखा तब भी वह शायद ही समझ पाया हो कि वह अब अपने पापा को फिर कभी नहीं देख पाएगा। पापा-पापा की किलकारी निकालने वाला आरव बस रोने लगा। कभी मामा तो कभी दादा का कंधा उसका सहारा बना। इस दौरान हर किसी की नजर आरव की तरफ थी। जैसे ही उसने मामा की गोद में चढ़कर मुखाग्नि दी, उस वक्त भी वह रोता ही रहा। लोगों की आंखें नम हो गईं। रोते हुए उसने मुखाग्नि दी और बस इतना बोला ‘पापा जा रहे’।

महिलाएं बोलीं- ‘अजय हमारा बेटा था, हम पाक से युद्ध को तैयार’
शहीद अजय के गांव की महिलाओं ने शहीद बेटे से प्यार और पाकिस्तान से नफरत का संदेश दिया। महिलाओं ने यहां तक ऐलान कर डाला कि वह चूड़ियां उतारकर हाथ में हथियार लेकर आतंकियों से मुकाबले के लिए कश्मीर जाने और पाकिस्तान के खिलाफ रण के मैदान के उतरने को तैयार हैं। कुसुम और सतवीरी का कहना था, ‘गांव के हर घर में अजय हैं। सरकार आए हमसे हमारे बेटे देश की रक्षा के लिए ले जाए और आंतक के खात्मे के लिए आरपार की जंग करें।’

युवा बोले- हम भी हैं अजय कुमार
अजय कुमार का पार्थिव शरीर जब घर लाया जा रहा था तो सैकड़ों युवा बाइक लेकर पाकिस्तान विरोधी नारे लगा रहे थे, हर तरफ से एक ही सदा आ रही थी- ‘मोदीजी हमें भी दो मौका, हम भी हैं अजय कुमार।’ शहीद अजय के दोस्त युवा सुनील का कहना था, ‘अगर सरकार बदला नहीं लेगी तो आमजन का आक्रोश भड़केगा। गांव में हर घर में एक कम से कम एक युवक फौज में जाने के काबिल है। सरकार उन्हें बतौर सैनिक तैयार करे ताकि वह अपने शहीद अजय की तरह देश की रक्षा के लिए जान न्यौछावर करने वाले दूसरे भाइयों का भी सीमा पर बदला ले सकें।’

मार्ग का नामकरण शहीद अजय के नाम पर हो, स्मारक बने
बसा बांगर के ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार से पहले मंत्री सत्यपाल सिंह को एक ज्ञापन देकर गांव के संपर्क मार्ग का नाम ‘अजय’ रखने और स्मारक बनवाने की मांग की। स्मारक में अजय की प्रतिमा लगाने की भी मांग की। हालांकि, इस दौरान कई ग्रामीणों ने केंद्र में मंत्री सत्यपाल सिंह से बातचीत में सख्ती भी दिखाई। आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा, ‘आतंकी हमारे बच्चों को निशाना बना रहे हैं। सरकार सख्त खत्म उठाने में देरी क्यों कर रही है।’

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