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भेल के चार अफसरों से विजिलेंस की पूछताछ

भोपाल

भेल कारखाने के इलेक्ट्रिकल मशीन विभाग में लंबे समय से एक ही सप्लायर से लाखों का सामान खरीदने का मामला देर सवेर भेल की विजिलेंस की नजर में चढ़ गया है। चर्चा है कि इस सप्लायर को काफी फायदा पहुंचाया गया है। मामला मोटर की बियरिंग खरीदी से जुड़ा हुआ है। यहां तक कि बाहर के सप्लायरों के भेल में रजिस्ट्रेशन होने से कतिपय अफसर रोक लगा देते हैं। चर्चा है कि इस मामले की शिकायत के बाद भेल की विजिलेंस विभाग ने ईएम के अपर महाप्रबंधक विपुल अग्रवाल, सीनियर डीजीएम द्वय आरपी गेरा व एनके विनोदिया और आईएमएम प्लानिंग के जयचन्द्र सिंह से पूछताछ की। इसके तार आनंद नगर की एक कंपनी से जुड़े हुए है। इस सामान खरीदी दरों में काफी अंतर बताया जा रहा है। पहले भी एल-1 के चक्कर में जर्मनी व कलकत्ता की कंपनी बाहर हो चुकी है इसका फायदा आनंद नगर की कंपनी ने उठाकर कतिपय अफसरों को खुश कर डाला। चर्चा है कि विजिलेंस जांच के बाद ही खुलासा हो पायेगा कि माजरा क्या है।

मामला सीआईएम के साहब का

वैसे भी एक विभाग में जमें रहने की बात भेल कारखाने में आम हो गई है इसके चलते संबंधित अधिकारी मनमाना काम करने से बाज नहीं आ रहा है। भेल ही मामला स्कील डेवलपमेंट से ही जुड़ा क्यों न हो। यहां यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि करे कोई भरे कोई। ऐसा ही मामला सीआईएम विभाग में चर्चाओं में है। यहां पदस्थ एक अफसर आये दिन स्कील डेवलपमेंट से सीआईएम विभाग से नये-नये लोगों की भर्ती करने में लगे हैं। शॉप इन्चार्ज यह भी देखने की जरूरत नहीं समझते कि क्या इनको इन्सुलेशन के विषय में जानकारी है भी कि नहीं। कंपनी की गाइड लाईन से तो इन साहब का कुछ भी लेना देना नहीं है। इधर यह भी चर्चा है कि शनिवार को कस्तूरबा की प्रमुख के रिटायरमेंट के बाद भले ही जीएम एचआर को काम सौंपा हो लेकिन खुद जीएम एचआर कस्तूरबा के नये प्रमुख के लिए कार्पोरेट प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहे हैं अब देखना यह है कि इसकी प्रमुख सीनियर डॉ. वंदना दवे बनेंगी या फिर डॉ. अल्पना तिवारी।

ट्रेनीज से विभाग के बन गये बड़े साहब

भेल कारखाने में विजिलेंस गाइड लाईन का कितना पालन होता है उसका उदाहरण टीजीएम विभाग में देखने को मिल सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों पर इस बात की चिंता नहीं है कि एक ही विभाग में पूरी जिदंगी गुजारने का सपना संजोये कुछ अफसर कंपनी का कम और अपना भला ज्यादा सोचने लगे हैं। चर्चा है कि टीजीएम विभाग के एक अफसर जब भेल में नौकरी करने आये तब एक मामूली ट्रेनी इंजीनियर के रूप में भर्ती हुए थे और आज विभाग के बड़े साहब बन बैठे हैं। इसके चलते विभाग में मनमाने काम का दौर लगातार चलता रहा है और एक महाप्रबंधक के संरक्षण में यह सब फलता फू लता रहा। अब लोग कहने लगे हैं कि अब उनके के रिटायर होने के बाद भी टीजीएम के साहब को बचाने या हटाने की कोशिश कौन कर रहा है यह समझ में नहीं आ रहा है।

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