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एमसीएम में पहुंचे दो जीएम

भोपाल

ऐसा बहुत कम होता है कि भेल के मुखिया दिल्ली में होने वाली एमसीएम की बैठक में न पहुंचे। इस बार कुछ जरूरी काम होने से बड़े साहब तो जबलपुर रवाना हो गये और एमसीएम की बैठक का जिम्मा 2017 में महाप्रबंधक बने दो अफसरों को सौंप गये। इस बात को लेकर भेल के कुछ सीनियर महाप्रबंधकों को नागवार गुजरी और वह प्रशासनिक भवन की बिल्ंिडग में चर्चा करते नजर आये। भीतर ही भीतर वह नाराज तो थे लेकिन यह कहने से भी नहीं चुके बड़े साहब के खास होने के कारण इन्हें एमसीएम की बैठक में जाने का मौका दिया गया। अब सीनियर अफसर कुछ भी कहें लेकिन जिस में दम है वही साहब का खास होता है। इधर कारखाने में एचआर विभाग की चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। विभाग तुगलगी फरमान जारी कर कर्मचारियों के तबादले आदेश संबंधित विभाग से बिना पूछे तो जारी कर देता है लेकिन जैसे ही उन पर दबाव आता है तो जो जहां था वहीं बना रहता है।

हेल्पिंग हेण्ड में वेतन भुगतान

भेल लेडीज क्लब द्वारा संचालित हेल्पिंग हेंड की वाटिका से काम छोड़ चुके एक कर्मचारी के वेतन भुगतान का मामला चर्चाओं में है। इस मामले को सुन लोग दांतों तले ऊंगली दबा लेते हैं। दरअसल मामला प्रकाश में तब आया जब वेतन भुगतान के समय दस माह पहले काम छोड़ चुके कर्मचारी की वेतन स्लिप किसी दूसरे कर्मचारी के हाथ में पहुंच गई, बस हड़कंप सा मच गया। यदि यह वेतन स्लिप दूसरे के हाथ नहीं लगती तो पता ही नहीं चल पाता कि आखिर हो क्या रहा है क्योंकि वेतन तो सीधा बैंक में जाता है। लोग चर्चा करने लगे हैं कि कहीं न कहीं हेल्पिंग हेंड की भूमिका संधिग्द तो नहीं। हालांकि प्रबंधन ने एक प्रबंधक को यहां से हटा तो दिया लेकिन फिर से दबाव के चलते वापस भी ले लिया। गौरतलब है कि दस माह पहले काम छोड़ चुके इस कर्मचारी भेल की कैन्टीन में मिठाई व नमकीन का ठेका भी है। वैसे भी इसे खुश करने में कोई पीछे दिखाई नहीं दे रहा है।

मामला टाउन एडवाइजरी कमेटी का

भेल प्रशासन ने टाउनशिप की समस्या को लेकर भेल टाउन एडवाइजरी कमेटी का गठन किया है। लंबे समय से इस कमेटी की बैठक न होने के कारण कई काम रूके पड़े हैं। इसकी चिंता न तो प्रबंधन को है और न ही नेताओं को बल्कि सिर्फ परेशानी उठानी पड़ रही है तो आम कर्मचारी को, इसके पीछे का कारण साफ है कि जब भेल के दो जीएम यानी इस कमेटी के चेयरमेन और वरिष्ठ सदस्य का तबादला ही भोपाल यूनिट से बाहर हो गया है तो कमेटी चले तो कैसे। अब इस बात की चर्चा होने लगी है कि प्रबंधन जब दो जीएम की जगह नये चेयरमेन बनाने के लिए मौन धारण कर चुकी है तो कमेटी बने तो कैसे बने। इसके लिए विनय निगम और पीके मिश्रा के नाम की चर्चाएं हैं। दूसरी और भेल स्पोटर्स क्लब और स्पोटर्स अथॉरिटी में भी वित्तीय अधिकार को लेकर कई काम रूके पड़े हैं। अब चर्चा है कि वित्तीय अधिकार जल्द ही स्पोटर्स अथॉरिटी को मिलने वाले है।

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