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नाम भेल एम्प्लाई और रिटायर्डो का राज

भोपाल

भेल में एक संस्था ऐसी भी है जिसका नाम भेल एम्प्लाई को-ऑपरेटिव सोसायटी लेकिन इस सोसायटी 80 फीसदी से ऊपर रिटायर्ड कर्मचारी सदस्य है, इसको लेकर आज भी भेल कर्मचारियों में चर्चा का विषय है। संस्था के कर्ता-धर्ताओं ने रिटायर लोगों की सदस्यता को बरकरार रखकर संस्था के नाम का ही रूप बदल दिया। चर्चा है कि इसी माह इस संस्था के चुनाव होना तय माना जा रहा है। ऐसे में यहां रिटायर्ड सदस्यता पाने में सफल हो गये। संस्था नाम के अनुरूप काम नही कर पा रही। पिछली बार भेल प्रबंधन ने भी हाथ खींच लिये तो इस बार अध्यक्ष का चुनाव भी इन्हीं सदस्यों में से होगा। अब देखना यह है कि भेल की यूनियनों में रिटायर्ड नेताओं की तरह इस संस्था में भी इस चुनाव में रिटायर्ड नेताओं की भरमार से इंकार नहीं किया जा सकता। चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई है और रिटायर्ड सक्रिय है। कर्मचारी कहने लगे है कि यूनियनों की तरह अब इस संस्था में भी रिटायर्ड संचालक मंडल मेंं ज्यादा जगह पा जायेंगे।

अगले माह भेल में हो सकता है फेरबदल

भेल के ईडी दो साल से ज्यादा का समय पूरा कर चुके हैं। वह अगले माह व्यापक स्तर पर फेरबदल का मन बना चुके है। बेहतर परफार्मेंस वाले अफसरों को अच्छे विभागों में बिठाने का मूड़ में दिखाई दे रहे हैं। चर्चा है कि फीडर्स, सीएमजी, पीएमजी,स्वीचगियर, क्वालिटी ,फेब्रीकेशन और ईएम ग्रुप में भी फेरबदल की संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता है। इधर मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी की तर्ज पर प्रमोशन पाने वालों में किसके पत्ते कटेंगे किसके नहीं यह तो प्रशासनिक भवन में चर्चाएं जारी हैं। खबर है कि विभाग के प्रमोशन पाने वाले अपर महाप्रबंधक स्तर के दो अफसर पहले ही शिक ायतों से घिरे पड़े हैं, और एक अफसर थर्मल कॉमर्शियल भेल दिया गया है। इस हिसाब से तीन नये चेहरे राजीव सरना, संजय चन्द्रा और एफ रेहमान प्रमोशन की कतार में खड़े हैं। अब देखना यह है कि ईडी की रहमत किस पर बरसती है।

सेन्ट्रल वक्र्स कान्ट्रेक्ट डिपार्टमेंट

यूं तो भेल जैसी महारत्न कंपनी में सेन्ट्रल वक्र्स कान्ट्रेक्ट डिपार्टमेंट कंपनी के फायदे के लिए बनाया था लेकिन आजकल यह डिपार्टमेंट चर्चाओं में है। लोग कहने लगे हैं कि ठेकेदारों को एक्सटेंशन देकर  अपनी मर्जी का काम करवाया जा रहा है। सिर्फ कारखाने में क्रेन का ही नहीं बल्कि हर डिपार्टमेंट में एक्सटेंशन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इधर ब्लॉक 4 में प्लेटिंग शॉप में बड़ी मात्रा में कोटिंग पाउडर खरीद का मामला भी चर्चाओं में है जो यहां पड़े-पड़े सड़ रहा है। रही बात इस विभाग के पेनल बाक्स की तो यह भी कचरे के ढेर में पड़े दिखाई देंगे। भगवान भला करें स्वीचगियर के साहब का जिन्हें यह मटेरियल दिखाई ही नहीं दे रहा है।

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