Tuesday , March 19 2019
Home / कॉर्पोरेट / आसान नहीं है प्रेमजी बनना, सभी अरबपति पीछे

आसान नहीं है प्रेमजी बनना, सभी अरबपति पीछे

नई दिल्ली

देश में जब परोपकार के लिए दान की बात आती है, तो दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी के सामने उनका कोई भी समकक्ष दूर-दूर तक नहीं दिखता है। प्रेमजी ने हाल में देश के चौथे सबसे बड़े सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाता प्रेमजी ने विप्रो में अपने लगभग 34 फीसदी शेयर से आने वाली आमदनी को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को दान करने की घोषणा की है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन परमार्थ का काम करता है। कंपनी में 34 फीसदी हिस्सेदारी लगभग 52,750 करोड़ रुपये बैठती है।

यही नहीं, प्रेमजी ने विप्रो के 67 फीसदी शेयर से होने वाली आमदनी को चैरिटेबल फाउंडेशन को दान करने की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी में प्रेमजी के परिवार और कंपनियों की हिस्सेदारी 74.30 फीसदी है। अजीम प्रेमजी के समकक्ष अरबपति हालांकि उनकी तरह दानवीर नहीं हैं। बेन ऐंड कंपनी द्वारा पिछले सप्ताह जारी इंडियन फिलेनथ्रॉपी रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 से लेकर अब तक प्रेमजी को छोड़कर 10 करोड़ रुपये और उससे अधिक दान करने वालों की संख्या में चार फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इस दौरान अल्ट्रा-रिच (जिनकी कुल संपत्ति 35 करोड़ रुपये से अधिक है) लोगों की संख्या में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘सभी लोगों द्वारा किए गए दान पर नजर डालें, तो पता चलता है कि परोपकार के लिए किए गए कुल दान में 55 फीसदी हिस्सेदारी यूएचएनआई (अल्ट्रा हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स) के बड़े दान (10 करोड़ रुपये या अधिक) की है और सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन आंकड़ों में 80 फीसदी की रकम अजीम प्रेमजी द्वारा किए गए दान की है। 2014 से लेकर अब तक 10 करोड़ रुपये और उससे अधिक दान करने वालों की संख्या में चार फीसदी की गिरावट आई है। यह परेशान करने वाली बात है, क्योंकि इस दौरान यूएचएनआई परिवारों की तादाद 12 फीसदी की दर से बढ़ी है। और 2022 तक ऐसे परिवारों की संख्या 1,60,600 परिवारों से दोगुनी बढ़कर 3,30,400 और उनकी संपत्ति 1,53,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,52,000 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है।’

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

अनिल अंबानी पर अभी भी 1 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज?

नई दिल्ली, बड़े भाई की मदद से अनिल अंबानी 462 करोड़ रुपये का बकाया चुका …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)