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भारतीय सेना: पद नहीं भी बढ़ा, पैसा बढ़ेगा!

नई दिल्ली

प्रमोशन न होने की स्थिति में दो साल बाद सैलरी बढ़ने का सिस्टम यानी नॉनफंक्शनल अपग्रेडेशन (एनएफयू), जो लगभग सभी सेंट्रल सर्विसेस में मिल रहा है उसका इंतजार फौज को भी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब फैसले का इंतजार है। कोर्ट में रक्षा मंत्रालय की तरफ से आर्म्ड फोर्सेस को यह सुविधा देने की मांग का विरोध किया गया है जिससे फौजी खफा हैं। ब्यूरोक्रेसी और सरकार के खिलाफ नाराजगी वह अब सोशल मीडिया पर जता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला चुनाव से पहले आने की उम्मीद है।

चुनाव में दिखाएगा असर
मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ (रिटायर्ड) कहते हैं कि फैसले का ज्यादा नहीं तो कुछ असर तो चुनाव में जरूर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पहली नजर में यह ब्यूरोक्रेसी बनाम आर्म्ड फोर्सेस लगता है, लेकिन इसका असर बीजेपी पर होगा क्योंकि रक्षा मंत्री बीजेपी की हैं। चुनाव से पहले फैसला आने की उम्मीद है और उसका असर भी होगा। उन्होंने कहा कि एनएफयू देना स्टेटस बराबर करने के लिए जरूरी है। अभी ब्यूरोक्रेसी में जो रैंक 27 साल में मिल जाता है वह फौज में 35-38 साल में मिलता है। 1-2 पर्सेंट को प्रमोशन मिलता है और ज्यादातर कर्नल में ही रिटायर हो जाते हैं। एनएफयू मिलने से कम से कम ग्रेड पे बराबर होगी।

यह है मामला
सुप्रीम कोर्ट में डिफेंस मिनिस्ट्री ने आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले का विरोध किया जिसमें कहा गया कि एनएफयू सेंट्रल आर्म्ड फोर्स में यानी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में भी लागू किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से कहा गया कि आर्म्ड फोर्स का सांगठनिक ढांचा अलग है इसलिए कोई पॉलिसी जो ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस पर लागू होती है उसे डिफेंस सर्विस पर लागू नहीं किया जा सकता। डिफेंस फोर्स रैंक आधारित संगठन है और एनएफयू लागू होने से कठिन परिस्थिति पैदा हो जाएगी, कमांड की इंटेसिटी, अनुशासन, कंट्रोल और क्षमता पर गलत असर पड़ेगा। डिफेंस फोर्स में काम कर रहे ऑफिसर्स के मोटिवेशन लेवल पर भी फर्क पड़ेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिफेंस फोर्स को कई दूसरी सुविधाएं मिलती हैं जो सिविल सर्विसेज में नहीं मिलती। इसे लेकर अब सोशल मीडिया पर रिटायर्ड फौजी आक्रामक दिख रहे हैं।

क्या है एनएफयू
आईएएस और दूसरे ग्रुप ए की सर्विस के बीच गैरबराबरी खत्म करने के लिए छठे पे कमिशन की सिफारिश पर 1 जनवरी 2006 से एनएफयू लागू किया गया। इसका मतलब यह कि अगर उस सर्विस में एक बैच के अधिकारी को प्रमोशन मिल गया और बाकी को नहीं मिला तो उसके दो साल बाद बाकियों को बिना प्रमोशन यानी फंक्शनल अपग्रेडेशन के भी सैलरी अपग्रेड हो जाएगी। यह शुरू में 49 ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस के लिए था लेकिन बाद में इसे आईपीएस, इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में भी लागू कर दिया गया। 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसे सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स- यानी सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी में भी लागू करने का फैसला दिया। जिसके बाद अब बस आर्म्ड फोर्स यानी आर्मी, नेवी, एयरफोर्स ही बिना एनएफयू के हैं।

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