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न्यू जीलैंज आतंकी हमला:कैप्टन की देरी से हमले में बची बांग्लादेश टीम

क्राइस्टचर्च (न्यू जीलैंड)

क्रिकेट के खेल में उम्दा प्रदर्शन के लिए सही टाइमिंग बेहद जरूरी है। लेकिन शुक्रवार को न्यू जीलैंड के क्राइस्टचर्च में ‘टाइमिंग’ से चूकने पर ही बांग्लादेशी क्रिकेटर्स को जिंदगी का तोहफा मिल गया। न्यू जीलैंड के इतिहास में सबसे भयावह आतंकवादी हमले के शिकार होकर 49 जानें चली गईं, लेकिन वहां का दौरा कर रही बांग्लादेशी टीम बेहद खुशकिस्मत रही कि वह आतंकी हमले का निशाना बनी मस्जिद में जुमे की नमाज के लिए थोड़ी देरी से पहुंची। इसकी वजह थी बांग्लादेशी कप्तान महमूदुल्लाह द्वारा हड़बड़ी में ही सही, लेकिन 9 मिनट तक की गई प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस।

बांग्लादेश की पूरी टीम को हेगली पार्क स्थित उसी मस्जिद अल नूर में नमाज अदा करने जाना था, जो बंदूकधारी की भयावह गोलीबारी का शिकार हुई। इसके अलावा एक और मस्जिद को भी निशाना बनाया गया। उन 9 मिनटों ने क्रिकेटरों को जिंदगी बख्श दी। टीम शनिवार से न्यू जीलैंड के खिलाफ अपना तीसरा और आखिरी टेस्ट मैच खेलने जा रही थी और इसी के साथ उनके टूर का भी अंत होता, लेकिन अब हमले के बाद आखिरी मैच को भी रद्द कर दिया गया है। आईसीसी ने टेस्ट रद्द होने का पूरा समर्थन किया है।

पत्रकार की आंखों देखी
क्राइस्टचर्च में मौजूद बांग्लादेशी खेल पत्रकार मोहम्मद इसाम अफरातफरी और खौफ की घटना के गवाह बने। इसाम ने बताया कि दिन में 1 बजे बांग्लादेश टीम हैग्ली ओवल में ट्रेनिंग सेशन के लिए पहुंची, लेकिन तब बारिश आने वाली थी। ऐसे में उन्होंने पास स्थित मस्जिद जाने का फैसला किया। यह भी योजना बनी थी कि लिंकन यूनिवर्सिटी जाकर इंडोर ट्रेनिंग सेशन किया जाए, लेकिन दूर होने के कारण उसे टाल दिया गया। करीब 1 बजकर 27 मिनट पर कप्तान महमूदुल्लाह ने हैग्ली ओवल में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वह हड़बड़ी में थे क्योंकि टीम के बाकी मेंबर्स मस्जिद जाने के लिए तैयार थे और बस में बैठे थे। बावजूद इसके उन्होंने 9 मिनट तक पीसी की।

मदद की कॉल से हैरान
करीब 1 बजकर 35 मिनट पर इसाम पार्किंग एरिया में थे और टीम मेंबर्स बस में बैठ चुके थे। इसमें 17 लोग सवार थे, जिसमें प्लेयर्स के अलावा टीम मैनेजर खालिद मशूद, टीम के विडियो एनलिस्ट भारत के श्रीनिवास चंद्रशेखरन और मसाजर मोहम्मद सोहेल भी शामिल थे। हालांकि टीम के स्पिन कंसलटेंट और पूर्व भारतीय स्पिनर सुनील जोशी तब होटेल में ही रुके रहे।

इसाम को थोड़ी देर बाद टीम के सबसे सीनियर सदस्य तमीम इकबाल का फोन आया, जिसमें वह गोलीबारी की बात कहकर मदद की गुहार लगा रहे थे। इसाम को पहले लगा कि तमीम शायद उनसे मजाक कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने तुरंत दूसरी बार कॉल किया जिसमें उनकी आवाज पूरी तरह लड़खड़ाई हुई थी। तमीम ने उनसे कहा कि वह पुलिस को कॉल कर दें क्योंकि मस्जिद के अंदर गोलीबारी हो रही है जब खिलाड़ी उसके अंदर घुसने ही वाले थे।

देखा वह भयावह मंजर
इसाम हड़बड़ी में निकलकर भागे और एक महिला की गाड़ी से लिफ्ट लेकर डीन्स ऐवेन्यू पहुंचे जहां वह मस्जिद स्थित थी। बांग्लादेशी पत्रकार मजहरउद्दीन और उत्पल शुव्रो भी उनके साथ हो लिए। पुलिस ने मस्जिद की नाकेबंदी कर रखी थी। टीम की बस पास ही खड़ी थी। मौके पर कई एंबुलेंस मौजूद थीं। इसाम जब दाहिनी ओर मुड़े तो भौचक रह गए। जमीन पर एक शव पड़ा था और हर जगह खून ही खून बिखरा हुआ था। जब वह बस के करीब पहुंचे तो देखा कि कई बांग्लादेशी प्लेयर्स बस से दूर भाग रहे हैं। बांग्लादेश के क्रिकेटर इबादत हुसैन ने उन्हें पकड़ लिया और अपने साथ भागने को कहा। उस वक्त तक इसाम को पता नहीं था कि वाकई हुआ क्या है और क्या टीम को ही हमले का निशाना बनाया गया है।

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