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न्यू जीलैंड हमला: एक बहादुर युवक ने हमलावर से छीनी बंदूक, कई को बचाया

क्राइस्टचर्च

क्राइस्टचर्च की मस्जिद में हुए भयानक हमले में अपनी जान बचाने वाले लोगों ने उस खौफनाक मंजर बयां किया। उन्होंने बताया कि हत्या बुजुर्ग और बच्चों की परवाह किए बगैर बंदूक चला रहा था। हमले से पहले अनवर अलसलेह भी नमाज की तैयारी कर रहे थे। अनवर उसी मस्जिद में मौजूद थे, जिसे हत्यारे ने अपना निशाना बनाया।

जिस समय यह हमला हुआ, अनवर ने खुद को बाथरूम में छिपा लिया और आपातकालीन सेवाओं को फोन करने लगा। स्थानीय मीडिया की मानें तो हमलावर मुसलमानों को लेकर बेहद खराब बातें बोल रहा था। वह कह रहा था, ‘आज मैं तुम्हे मार डालूंगा।’ अनवर ने बताया कि वह बाथरूम के अंदर से सुन सकता था कि लोग जान बचाने के लिए उससे गुहार लगा रहे थे, लेकिन हमलावर तब तक फायरिंग करता रहा जब तक लोग मर नहीं गए।

अल-नूर मस्जिद से तकरीबन 5 किलोमीटर दूर बनी लाइनवुड ऐवेन्यू मस्जिद में सात लोग मारे गए। यहां नमाज के लिए आए सैयद मजहरुद्दीन ने न्यू जीलैंड हेरल्ड बताया कि एक व्यक्ति बॉर्डी आर्मर और हेलमेट पहने हुआ था, जिसने फायरिंग शुरू कर दी। मस्जिद के दरवाजे पर ही कुछ बुजुर्ग लोग नमाज पढ़ रहे थे, उसने उन पर गोली चलाना शुरू कर दिया।

लाइनवुड मस्जिद में एक जबरदस्त बहादुरी का किस्सा भी नजर आया, जहां सैयद मजहरुद्दीन ने बताया कि एक व्यक्ति ने हमलावर से मुठभेड़ भी की। मजहरुद्दीन ने बताया, ‘वह लड़का आम तौर पर मस्जिद का काम देखता है। उसने जब देखा कि हमलावर का ध्यान कहीं और है तो उसने हमलावर को जबरदस्त धक्का दिया और उसकी बंदूक पर झपट पड़ा। इस लड़के ने बंदूक का ट्रिगर ढूंढने की कोशिश की, लेकिन उसे नहीं मिला। तब तक हमलावर बाहर इंतजार कर रही कार में जाकर बैठ गया और वहां से भाग गया।’

अल-नूर मस्जिद में पूरा वाक्या देखने वाले एक चश्मदीद ने बताया, ‘एक महिला चिल्ला रही थी और हमलावर ने सीधे उसके चेहरे पर गोली चला दी।’ उसने बताया कि हमलावर ने अपने पैरों में बंदूक की मैग्जीन बांध रखी थी। एक व्यक्ति ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हमलावर इस दौरान काफी शांत नजर आ रहा था।

मिरवाइज नाम के एक अफगान रिफ्यूजी ने बताया कि मौत उसे सामने नजर आ रही थी, जब एक बोली उसके सिर के पास से गुजर गई। उन्होंने बताया, ‘उसने हमारे कमरे की तरफ फायरिंग शुरू कर दी। जब बंदूक की एक गोली मेरे सर के पास से गुजरी तो मैं जमीन पर लेट गया। अगर एक-दो सेंटीमीटर का अंतर होता तो शायद गोली मुझे लग जाती।’ मिरवाइज ने बताया कि जब हमलावर का ध्यान कहीं और था, उस समय वह वहां से भागने में कामयाब रहा।

कार्ल पॉमरे नाम का स्थानीय शख्स अपने कर्मचारी के साथ अल-नूर मस्जिद के पास से गुजर रहा था। तभी उसने देखा कि लोग मस्जिद से भाग रहे हैं और जमीन पर गिर रहे हैं। कार्ल ने अपनी गाड़ी रोकी और घायलों की मदद करने लगा। घायलों में पांच साल की एक बच्ची थी।

उसने लोकल मीडिया को बताया, ‘हम उस बच्ची को कार में लाने में सफल रहे और उसे हॉस्पिटल ले गए, जहां उसकी हालत काफी नाजुक थी। मेरा कर्मचारी जिस व्यक्ति की मदद कर रहा था, उसे हम नहीं बचा सके। घायल ने मेरे कर्मचारी के हाथों में ही दम तोड़ दिया। यह दहला देने वाला था।’

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