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प्रियंका गांधी ने बदली स्ट्रैटेजी, अब मोदी नहीं निशाने पर योगी

लखनऊ,

लोकसभा चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा संभाल रही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव नजर आ रहा है. प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा बोट यात्रा के दौरान प्रियंका ने अपने भाषणों में प्रमुखता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का विरोध किया, लेकिन पिछले 24 घंटों में उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधा टारगेट किया है. दिलचस्प बात ये है कि योगी को घेरने के लिए प्रियंका ने यूपी के मुद्दों को ही चुना है.

प्रियंका गांधी वाड्रा ने चार ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जिन्हें लेकर यूपी की जनता के बीच नाराजगी देखने को मिलती रही है. इनमें गन्ना किसान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशाकर्मी और शिक्षामित्रों की मांग शामिल है. प्रियंका गांधी ने सीएम योगी की घेराबंदी रविवार को उस वक्त शुरू की थी, जब योगी को गन्ना लैंड पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रैली करने जाना था. एक खबर का हवाला देते हुए प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया और लिखा कि गन्ना किसानों के परिवार दिनरात मेहनत करते हैं, मगर यूपी सरकार उनके भुगतान का भी जिम्मा नहीं लेती. सिर्फ इतना ही नहीं, अब तक पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चौकीदार चोर है नारे का इस्तेमाल कर रही कांग्रेस की रणनीति से थोड़ा आगे बढ़कर प्रियंका गांधी ने सीएम योगी के लिए भी इस शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि चौकीदार सिर्फ अमीरों की ड्यूटी करते हैं, गरीबों की इन्हें परवाह नहीं है. योगी के खिलाफ प्रियंका के आक्रामक मोड का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने अब तक किए गए अपने कुल 12 ट्वीट्स में 4 योगी सरकार के खिलाफ किए हैं.

23 जनवरी 2019 को कांग्रेस महासचिव नियुक्त होने के बाद प्रियंका गांधी ने फरवरी में ट्विटर पर दस्तक दी थी. इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड में हमला, मनोहर पर्रिकर की मौत और होली के मौके पर ट्वीट किए. अब तक उन्होंने एक भी ट्वीट में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन रविवार सुबह से वो लगातार योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बैक-टू बैक ट्वीट कर रही हैं. रविवार सुबह गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाने के बाद उन्होंने रात के वक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का मुद्दा उठाया.

उन्होंने लिखा कि यूपी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं राज्य कर्मचारी का दर्जा मांग रही हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने उनकी पीड़ा सुनने के बजाय उन पर लाठियां चलवाईं. मेरी बहनों का संघर्ष, मेरा संघर्ष है. इसके तुरंत बाद उन्होंने आशाकर्मियों के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि जो आशाकर्मी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाती हैं, उन्हें 600 रुपये मिलते हैं. लेकिन भाजपा सरकार ने कभी उनकी सुध नहीं ली. प्रियंका की इस आक्रामकता के बाद सीएम योगी आदित्नयाथ को भी मैदान में उतरना पड़ा. उन्होंने भी ट्वीट के जरिए प्रियंका को जवाब दिए.

रविवार को गन्ना किसानों के भुगतान पर ट्वीट करने के बाद अब योगी आदित्यनाथ ने आशाकर्मियों के मुद्दे पर भी प्रियंका गांधी को सीधा जवाब दिया है. योगी ने लिखा है कि कांग्रेस की डूबती नैय्या की नई खिवइया भ्रामक प्रचार से जनता को बरगलाने में लगी हैं. अब तक आशा बहनों की शुभचिंतक कहां थीं. नींद खुल गयी? योगी ने बताया कि हाल ही में सरकार ने इनके मानदेय में 750 रुपयों की वृद्धि की घोषणा की है. इससे पहले गन्ना किसानों के भुगतान पर योगी ने प्रियंका गांधी को जवाब देते हुए उन्हें ‘तथाकथित’ हितैषी बताया था. योगी ने गन्ना किसानों की बदहाली के लिए सपा-बसपा की पुरानी सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि जब 2012 से 2017 तक किसान भुखमरी की कगार पर था, तब ये हितैषी कहां थे, इनकी नींद अब क्यों खुली है? योगी ने किसानों को खुशहाल बताया था, तो सोमवार की सुबह प्रियंका गांधी ने सबसे पहले योगी आदित्यनाथ को ही निशाने पर ले लिया और ये नये मुद्दे पर उन्हें घेर लिया.

शिक्षा मित्रों का मुद्दा उठाते हुए प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया और लिखा कि शिक्षामित्रों की मेहनत का रोज अपमान होता है, सैकड़ों पीड़ितों ने आत्महत्या कर डाली. जो सड़कों पर उतरे सरकार ने उनपर लाठियां चलाई, रासुका दर्ज किया. भाजपा के नेता टी-शर्टों की मार्केटिंग में व्यस्त हैं. काश वे अपना ध्यान दर्दमंदों की ओर भी डालते. इस तरह उन्होंने योगी सरकार पर एक और मुद्दे की बौछार कर दी और रविवार सुबह से लेकर सोमवार सुबह तक 24 घंटे के अंदर उन्होंने चार बड़े मुद्दे उठाते हुए योगी सरकार को घेरने का काम किया. चुनावी दृष्टिकोण से प्रियंका के इस स्टैंड को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें जिस पूर्वी यूपी का प्रभार मिला है, वो सीएम योगी का गढ़ माना जाता है. ऐसे में सीधे उन्हें निशाना बनाकर प्रियंका सूबे की जनता और उनके मुद्दों से भी खुद को जोड़ना चाहती हैं.

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