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यूपी में कांग्रेस का ‘हाथ’ महागठबंधन के साथ, ऐसे कर रही मदद ​

नई दिल्ली/लखनऊ

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में फरवरी और मार्च में अपना चुनावी अभियान काफी जोरदार तरीके से शुरू किया था, लेकिन पहले चरण का चुनाव खत्म होने के बाद पार्टी अपनी रणनीति बदल चुकी है। अब जिन सीटों पर उसकी जीतने की उम्मीद नहीं है, वहां वह महागठबंधन की मदद कर रही है। ऐसे में जहां बीएसपी सुप्रीमो मायावती और एसपी प्रमुख अखिलेश यादव अपनी चुनावी रैलियों में कांग्रेस पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं, वहीं पार्टी पलटवार नहीं कर रही है। कांग्रेस का चुनावी अभियान अभी भी बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

पार्टी उन सीटों पर महागठबंधन के पक्ष में माहौल बना रही है, जहां उसका दावा काफी कमजोर है। देश की सबसे पुरानी पार्टी राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 64 पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है और उसके उम्मीदवारों पर करीबी नजर डालने के बाद महागठबंधन की मदद की साफ झलक मिलती है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, ‘इसमें कुछ भी नया नहीं है। हमने पहले ही 22 सीटों पर अपना दमखम झोंकने और बाकी सीटें महागठबंधन के लिए छोड़ने की योजना बनाई थी।’ कांग्रेस महासचिव प्रभारी प्रियंका गांधी भी उन्हीं सीटों पर ज्यादा जोर लगा रही हैं, जहां कांग्रेस की जीतने की संभावना ज्यादा है।

30 कांग्रेसी प्रत्याशी महागठबंधन को जीतने में मदद करेंगे
कांग्रेस ने शनिवार को उत्तर प्रदेश में 9 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इनमें से 5 नाम तो ऐसे हैं, जो सीधे तौर पर अपने निर्वाचन क्षेत्र में एसपी-बीएसपी महागठबंधन को जीतने में मदद करेंगे। राज्य में कुल मिलाकर 30 कांग्रेसी प्रत्याशी महागठबंधन को जीतने में मदद करेंगे। अब उदाहरण के लिए गाजीपुर का मामला देखते हैं। आजमगढ़ के पूर्व सांसद और बीजेपी नेता रमाकांत यादव आधिकारिक रूप से पार्टी में शामिल होने के 1 महीने से पहले ही कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में थे।

रमाकांत यादव लड़ना चाहते थे गाजीपुर से चुनाव
वह गाजीपुर में यादव मतदाताओं की बहुलता देखते हुए वहां से लड़ना चाहते थे। हालांकि, कांग्रेस लीडरशिप ने उन्हें साफ बता दिया कि वह किसी और सीट तलाश करें। इसकी दो वजहें थीं। पार्टी बीएसपी कैंडिडेट अफजाल अंसारी के लिए कोई मुश्किल नहीं खड़ा करना चाहती थी, जिन्हें मुस्लिम, यादव और दलित मतदाताओं का समर्थन हासिल है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस को गाजीपुर में यादव प्रत्याशी उतारने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम वोटरों की नाराजगी का भी डर था।

बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के लिए गाजीपुर में कांग्रेस का दांव
अफजल अंसारी, मुख्तार अंसारी के बड़े भाई हैं, जिनकी अपने समुदाय में काफी अच्छी पैठ है। कांग्रेस ने अफजल की मदद करने के लिए अजीत कुशवाहा को टिकट दिया। गाजीपुर में कुशवाहा मतदाताओं की तादाद भी काफी अच्छी है और यह परंपरागत तौर पर बीजेपी का वोटर माना जाता है। एक स्थानीय नेता ने कहा, ‘अजीत को जितना भी वोट मिलेगा, उससे सिर्फ बीजेपी को ही नुकसान होगा।’

झांसी और आंबेडकरनगर में कांग्रेस की गणित
इसी तरह कांग्रेस ने झांसी से शिवशरण कुशवाहा को झांसी और शिव कन्या कुशवाहा को चंदौली से मैदान में ‌उतारा है। शिवशरण पूर्व बीएसपी सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के भाई हैं जबकि शिवकन्या उनकी पत्नी हैं। दोनों ही उम्मीदवार कुशवाहा वोटरों के एक हिस्से को अपनी तरफ खींचकर महागठबंधन की राह आसान करेंगे। कांग्रेस ने आंबेडकर नगर में उम्मेद सिंह निषाद को टिकट दिया है, जो पूर्व दस्यु सुंदरी फूलन देवी के पति हैं। एक नेता ने उम्मेद सिंह की उम्मीदवारी का गणित सुलझाते हुए बताया कि निषाद अपने समुदाय को वोट काटेंगे। इस क्षेत्र में निषाद या तो अपनी जाति के प्रत्याशी को वोट करेंगे या फिर बीजेपी को।

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