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रिटर्न के मोर्चे पर अमेरिका, यूके, चीन जैसे बड़े शेयर बाजारों को BSE, NSE ने दी मात

नई दिल्ली

पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में भारतीय पूंजी बाजारों ने कुछ बड़े वैश्विक पूंजी बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया है। भारतीय बाजारों ने रिटर्न के मामले में जिन्हें पछाड़ा है, उनमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे विकसित देशों और चीन, ब्राजील जैसे विकासशील देशों के बाजार शामिल हैं। मार्च 2019 को खत्म हुए पिछले वित्त वर्ष में इंडियन कैपिटल मार्केट्स ने यह कमाल तब कर दिखाया जब उन्हें कई वैश्विक और घरेलू कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

भारतीय पूंजी बाजारों, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांकों (बेंचमार्क इंडिसेज) क्रमशः सेंसेक्स और निफ्टी के खुद के प्रदर्शन भी पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले बेहतर रहे। वित्त वर्ष 2018-19 में सेंसेक्स ने 17% जबकि निफ्टी ने 15% रिटर्न दिए।

ऊपर बताए गए देशों के इक्विटी मार्केट्स से मिले रिटर्न का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 2017-18 में भारतीय बाजारों के संवेदी सूचकांकों ने अमेरिका, ब्राजील, जापान, दक्षिण कोरिया और हॉन्ग-कॉन्ग में अंडरपरफॉर्म किया था। हालांकि, उस दौरान यूके और चीन में इनका परफॉर्मेंस बेहतर रहा था। संवेदी सूचकांकों के सकारात्मक प्रदर्शन और मार्केट से मिलने वाली फंडिंग में वृद्धि की वजह से 2018-19 में भारतीय पूंजी बाजारों का विस्तार बकरार रहा और 6% की वृद्धि के साथ इनका बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) 151 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

इसी तरह, म्यूचुअल फंड ऐसेट अंडर मैनेजमेंट 11.4% की वृद्धि के साथ करीब 24 लाख करोड़ रुपये की नई ऊंचाई पर जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ऐसेट अंडर कस्टडी भी 8.6% बढ़कर करीब 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस दौरान कैपिटल मार्केट्स से फंड जुटाने का ट्रेंड भी पॉजिटिव रहा और 5.3% वृद्धि के साथ डेट एवं इक्विटी से जुटाई गई फंडिंग करीब 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

म्यूचुअल फंड के मोर्चे पर सितंबर 2018 से डेट मार्केट में कुछ नकारात्मक गतिविधियों के कारण डेट ऑरियेंटेड फंड्स से कुछ पैसे बाहर निकले। हालांकि, इक्विटी ऑरियेंटेड म्यूचुअल फंड्स में पूरे वित्त वर्ष में पैसे आते रहे। अन्य म्यूचुअल फंड्स में 2018-19 के 12 में से 10 महीनों में पॉजिटिव नेट इन्फ्लो देखा गया।

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