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योगी की आयोग को चिट्ठी, लिखा- नहीं किया उल्लंघन, बयान देकर अपना फर्ज निभाया

लखनऊ,

आदर्श आचार संहिता के दौरान गलत बयानबाजी के लिए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रचार पर 72 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया है, जो आज सुबह 6 बजे से लागू हो गया है. इससे पहले चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ ने खुद को बेकसूर बताया था. योगी की यह चिट्ठी अब सामने आई है, जिसमें उन्होंने आयोग को बताया है कि उनका बयान बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के भाषण के बाद एक जिम्मेदार नागरिक के बतौर दिया गया है.

योगी आदित्यनाथ की तरफ से चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देते हुए 11 अप्रैल को यह चिट्ठी लिखी गई है. इस चिट्ठी में उन्होंने बताया है कि 9 अप्रैल को मेरठ में दिए गए मेरे भाषण पर गंभीरता से विचार किया जाए तो यह पता चलता है कि इस विषय की शुरुआत एक विपक्षी दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की थी.

चिट्ठी में योगी ने लिखा है कि ‘आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए एक पार्टी की अध्यक्ष (मायावती) ने मुसलमानों से उनकी पार्टी के समर्थन में वोट करने की अपील की थी, इसलिए देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारण मेरा फर्ज बनता है कि ऐसे लोगों का पर्दाफाश किया जाए’.

बजरंगबली में मेरी अटूट आस्था- योगी
चुनाव आयोग को भेजी गई इस चिट्ठी में योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को लेकर दिए गए बयान पर भी सफाई दी. योगी ने आयोग को बताया कि बजरंगबली में मेरी अटूट आस्था है और अगर इससे किसी को डर लगता है तो मैं अपनी आस्था नहीं छोड़ सकता.

मायावती के जिस बयान से इस विवाद के आरंभ का दावा योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं, वो मायावती ने 7 अप्रैल को सहारनपुर के देवबंद में दिया था. सपा-बसपा-रालोद की पहली संयुक्त रैली में मायावती ने मुस्लिमों से वोट न बांटने की अपील की थी. इसके बाद 9 अप्रैल को योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर के नजदीक मेरठ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर सपा-बसपा को अली पर विश्वास है तो हमें भी बजरंगबली पर विश्वास है. इसके अलावा योगी ने सपा-बसपा-कांग्रेस की आलोचना करते हुए यह भी कहा था कि ये लोग मंच-मंच पर जाकर अली-अली चिल्लाते हुए केवल एक हरा वायरस इस देश और संस्कृति में भेजना चाहते हैं लेकिन इस हरे वायरस की चपेट में पश्चिम यूपी को लाने की आवश्यकता नहीं है.

ये तमाम तर्क देते हुए योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग से कहा था कि उन्होंने अपने भाषण में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगा है न ही आचार संहिता का उल्लंघन किया है. लेकिन योगी की इस दलील को चुनाव आयोग ने दरकिनार कर दिया है और उनके प्रचार पर 72 घंटों की रोक लगा दी है.

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