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एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने बताया, कैसे चुकाएंगे 17,000 Cr का कर्ज

नई दिल्ली

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने NBT के गौरव लघाते को दिए इंटरव्यू में बताया कि वह 30 सितंबर तक लेंडर्स का बकाया चुका देंगे। उन्होंने बताया कि जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE) में जापान से लेकर भारत, यूरोप और अमेरिका के पांच निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई है। जनवरी में कंपनी के शेयर प्राइस में आई गिरावट पर अपनी गलती मानने के बाद दिए पहले इंटरव्यू में चंद्रा ने कहा, ‘अगर आपको इन निवेशकों के नाम बताऊं तो आप हैरान रह जाएंगे।’ उन्होंने शेयरहोल्डर्स को हाल में लिखे लेटर में अपनी गलती कबूल की थी। उन्होंने यह भी वादा किया कि ग्रुप पर 17,174 करोड़ का जो कर्ज है, उसकी पाई-पाई वह चुकाएंगे। पेश हैं इसके खास अंश:

ZEE में हिस्सेदारी बेचने को लेकर क्या प्रोग्रेस है? क्या यह लेंडर्स को दिए 30 सितंबर की डेडलाइन से पहले हो जाएगा?
हमने दिसंबर 2018 में जब स्टेक बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी, तब गोल्डमैन सैक्स और लायनट्री ने हमारे सामने 12-14 निवेशकों के नाम रखे थे। इनमें से हमने दो कंपनियों को चुना था, लेकिन अब इनके अलावा कई और कंपनियां इस रेस में शामिल हो गई हैं। इन कंपनियों ने हमसे सीधे संपर्क किया है। कई बड़ी कंपनियों के नाम की अटकलें लगी हैं। मैं इनकी न ही पुष्टि कर रहा हूं और ना ही इनकार। हमने पांच कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया है। अप्रैल के अंत या मई के पहले हफ्ते तक हमें नॉन-बाइंडिंग टर्म शीट मिल जानी चाहिए। लेंडर्स ने हमें 30 सितंबर तक का समय दिया है। मुझे भरोसा है कि तक तक डील हो जाएगी।

ये कंपनियां ZEE में क्यों हिस्सेदारी लेना चाहती है?
वे 1.4 अरब की आबादी वाले बाजार का एक्सेस चाहती हैं। वैसे हर कंपनी के पास डील की खास वजहें हैं। कुछ ई-कॉमर्स के साथ कंटेंट को मिलाना चाहती हैं तो कुछ कंपनी पर पूरा कंट्रोल चाहती हैं। कुछ 50 पर्सेंट हिस्सेदारी पाकर खुश होंगी। कुछ इससे कम स्टेक लेना चाहती हैं।

क्या आपने निवेशकों के लिए कोई शर्त रखी है?
हम ऐसी कंपनी को साथ लाना चाहते हैं, जिससे वैल्यू क्रिएट हो। हम वैल्यूएशन के बारे में नहीं सोच रहे हैं। अगर शेयरहोल्डर्स की वैल्यू बढ़ती है और ZEE का विस्तार होता है तो इससे अच्छी बात क्या होगी।

आपने जिन्हें शॉर्टलिस्ट किया है, क्या वे सभी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हैं या उनमें कोई भारतीय कंपनी भी है?
ये कंपनियां जापान, यूरोप से लेकर अमेरिका और भारत की हैं। आपको इनका नाम जानकर हैरानी होगी।

पहले आप रणनीतिक निवेशक की तलाश में थे। बदली हुई स्थिति में क्या आप वित्तीय निवेशक की तलाश कर रहे हैं?
हम पाई-पाई बकाया चुकाना चाहते हैं। इसलिए निवेशक कोई भी हो, हमें इससे फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते वह कंपनी में वैल्यू जोड़े। मैं अभी इसकी डिटेल नहीं दे सकता, लेकिन हमें वित्तीय निवेशक के जुड़ने पर कोई ऐतराज नहीं है।

तो क्या सोनी सौदे की रेस से बाहर हो गई है?
मैं अभी कोई डिटेल नहीं दे सकता।

एस्सेल ग्रुप के और किस बिजनेस को बेचने की योजना है?
इंफा सेगमेंट में हम अपने सारे प्रोजेक्ट्स पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं और सही वैल्यू मिलने पर इनमें से कुछ को बेचेंगे। इसके बाद एस्सेल इंफ्रा प्लेटफॉर्म बनी रहेगी। वह 30 हजार करोड़ तक की एक बोली लगा सकती है। इसमें हिस्सेदारी बेचने के बारे में हम बाद में फैसला करेंगे। एस्सेल फाइनेंस और म्यूचुअल फंड बिजनेस को भी बेचा जाएगा। मैं कुछ प्राइवेट प्रॉपर्टी भी बेचने की सोच रहा हूं। कर्ज चुकाने के प्राइवेट प्रॉपर्टी बेचने में मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं होगी।

आपने बताया कि ZEE में 50% से अधिक हिस्सेदारी भी निवेशक खरीदना चाहते हैं। आप कितना स्टेक बेचने को तैयार हैं?
यह चुने हुए निवेशकों की पसंद पर निर्भर करता है।

एस्सेल ग्रुप की वित्तीय स्थिति पर काफी कुछ लिखा गया है। आप इन चिंताओं को कैसे देखते हैं?
देश में कई कंपनियां आज वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही हैं, लेकिन मुझे लगता है कि एस्सेल ग्रुप दूसरी कंपनियों से अलग है। सच कहूं तो हमारा बिजनेस सामान्य ढंग से चल रहा है। कंपनियां अच्छा परफॉर्म कर रही हैं। ZEE की ग्रोथ दोहरे अंकों में बनी हुई है और कोई स्ट्रेस नहीं है। यह बात सच है कि इंफ्रा बिजनेस में कुछ प्रोजेक्ट्स को बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन हमने मजबूत बिजनेस खड़े किए हैं और किसी राजनीतिक पार्टी की मेहरबानी भी नहीं ली। मेरे बेटे पुनीत और अमित मुझसे कहीं बेहतर काम कर रहे हैं। संस्थापक और पिता के रूप में मैं इससे बहुत खुश हूं। आप हमारे एंप्लॉयीज से बात करिए, आपको पता चल जाएगा कि कंपनी का कामकाज कितने सहज ढंग से चल रहा है।

आप ग्रुप के चेयरमैन हैं। मौजूदा हालात से आप इसे कैसे बाहर निकालेंगे?
एस्सार ग्रुप 90 साल पुराना है। इस दौरान मैं यह तीसरा डाउनटर्न देख रहा हूं। पहली बार 1967 और उसके बाद 2008 में हमने मुश्किल स्थितियों का सामना किया था। मुझे भरोसा है कि इस बार भी हम संकट से बाहर निकलेंगे। पहले 50 साल में हमने बैंकों को 39 हजार करोड़ का ब्याज चुकाया। उसकी तुलना में मौजूदा कर्ज काफी कम है। हमने कर्ज चुकाने की योजना बनाई है। अगर आप हमारे इंफ्रा बिजनेस में एसेट्स की बिक्री पर गौर करें तो इसके जुलाई और सितंबर के बीच पूरा होने की उम्मीद है। इसके साथ हम ऑपरेटिंग कंपनियों का 15-16 हजार करोड़ और 3,000 करोड़ का कॉरपोरेट डेट चुका देंगे। इसलिए 20 हजार करोड़ का कर्ज आसानी से खत्म हो जाएगा। बाकी का पैसा ZEE में हिस्सेदारी बेचकर चुकाया जाएगा।

डिश टीवी और एयरटेल डिजिटल टीवी के मर्जर पर आपकी क्या राय है?
डिश टीवी को मेरे भाई जवाहर चलाते हैं। मैं उसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा।

ग्रुप के भविष्य के बारे में आप कुछ कहना चाहते हैं?
हम डील पूरी होने और बैंकों का पूरा पैसा चुकाने के बाद भविष्य के बारे में बात करेंगे।

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