Wednesday , August 21 2019
Home / राज्य / गुजरात में बदल रहा चुनावी गणित, कई सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस में कांटे की टक्कर

गुजरात में बदल रहा चुनावी गणित, कई सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस में कांटे की टक्कर

अहमदाबाद

गुजरात को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गढ़ माना जाता है, लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों में इस राज्‍य के नतीजों पर सबकी निगाहें रहेंगी। विशेषकर इसलिए क्‍योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह का गृह राज्‍य है। कांग्रेस यहां बीजेपी की मुख्‍य प्रतिद्वंदी है और अगर बीजेपी की अधिकांश सीटें कांग्रेस के हाथ लगती हैं तो बीजेपी के लिए शर्मिंदगी की बात होगी।

हमेशा से बीजेपी हावी
बीजेपी गुजरात में हमेशा से हावी रही है। 1998 में बीजेपी को 26 में से 19 सीटें मिली थीं, जबकि 1999 में उसे 20 सीटों पर विजय मिली थी। हालांकि साल 2002 के गोधरा दंगों के बाद बीजेपी 2004 में महज 14 सीटों पर सिमट कर रह गई, जबकि कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं। 2009 में परिसीमन के बाद भी ज्‍यादा अंतर नहीं आया और बीजेपी ने 15 सीटें ही जीतीं। हालांकि मोदी फिर भी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करते रहे। लेकिन 2014 में चली मोदी लहर में कांग्रेस बह गई और बीजेपी को सभी 25 सीटें मिलीं।

2017 विधानसभा चुनावों का असर बाकी है
बीजेपी देश भर में मोदी के नाम पर वोट मांग रही है। स्‍थानीय प्रत्‍याशी का नाम और चेहरा उतने मायने नहीं रख रहे। लेकिन गुजरात में अभी भी 2017 के विधानसभा चुनावों की छाया पड़ रही है। वोटर गंभीर मुद्दों को खासकर ग्रामीण इलाकों में उठा रहे हैं। बीजेपी जरा से अंतर से ही विधानसभा चुनाव जीत पाई थी।

शहरी इलाकों में मजबूत, ग्रामीण हलकों में चुनौती
गुजरात के शहरी निर्वाचन क्षेत्रों पर बीजेपी की पकड़ मजबूत है। गांधीनगर, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में बीजेपी अपनी जीत को लेकर निश्चिंत लगती है लेकिन सौराष्‍ट्र, उत्‍तरी गुजरात और आदिवासी क्षेत्र बीजेपी के लिए चिंता बने हुए हैं।

कांग्रेस को पांच से सात सीटों पर जीत का भरोसा
कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्‍कर दे रही है। उत्‍तरी गुजरात में बनासकांठा, पाटन और सा‍बरकांठा में वह मुकाबले में है, जबकि मेहसाणा में बीजेपी-कांग्रेस के बीच मामला बहुत करीबी हो सकता है। केंद्रीय गुजरात में आणंद से भारत सिंह सोलंकी मजबूत स्थिति में हैं।

मेहसाणा में पटेल वोट खिसका
साल 2015-16 में मेहसाणा में पटेल असंतोष जोरों पर था। पटेल असंतोष के पहले पाटीदार पहले बीजेपी के समर्थक थे लेकिन अब उनके वोट खिसक सकते हैं। उप मुख्‍यमंत्री नितिन पटेल इसी क्षेत्र से आते हैं लेकिन हार्दिक पटेल का भी इस इलाके में खासा असर है और वह अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इसी तरह उत्‍तरी गुजरात के ठाकुर वोट दोनों पार्टियों में बंट गए हैं। सौराष्‍ट्र में अमरेली ने कांग्रेस को कुछ उम्‍मीद बंधाई है वहीं जूनागढ़ में कांटे की टक्‍कर होगी।

किसान असंतोष, पानी की कमी बड़े मुद्दे
गुजरात के ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी समस्‍याओं के समाधान को लेकर ज्‍यादा गंभीर हैं। पानी की किल्‍लत सौराष्‍ट्र और छोटा उदयपुर इलाके में बड़ी समस्‍या है, वहीं डीएपी व यूरिया की कीमत, उपज का सही दाम न मिलना किसानों की सबसे बड़ी चिंताएं हैं। मुआवजों और फसल बीमा के दावों के निपटारे में आने वाली समस्‍या ऐसे कारक हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों के वोटरों को प्रावित कर सकते हैं। हालांकि आदिवासी वोट हमेशा बंटते हैं लेकिन इन चुनावों में छोटा उदयपुर, पांच महल और डांग जिलों के अधिकांश वोटर खेतों में सिंचाई के लिए पानी की कमी की शिकायत कर रहे हैं।

जाति समीकरण की बराबरी पर
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अपने कुछ विधान परिषद सदस्‍यों को लोकसभा चुनावों में उतारा है। हालांकि, प्रत्‍याशी चुनने में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति ने खेल बिगाड़ा है। भरूच, खेड़ा और राजकोट कुछ ऐसी सीटें हैं। हालांकि, दिलचस्‍प तौर पर बीजेपी और कांग्रेस ने बीजेपी प्रत्‍याशियों की ही जाति वाले उम्‍मीदवारों को उनके सामने खड़ा किया है इसलिए जाति आधारित वोट बंट जाएंगे।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

एक और बाबा पर यौन शोषण का केस, वीडियो वायरल होते ही बाबा फरार

नई दिल्ली, बाबा राम रहीम और आसाराम बापू के बाद हरियाणा के एक और बाबा …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)