Monday , August 26 2019
Home / राजनीति / क्या वाराणसी में जीत के अंतर का बड़ा रिकॉर्ड बनाएंगे पीएम नरेंद्र मोदी

क्या वाराणसी में जीत के अंतर का बड़ा रिकॉर्ड बनाएंगे पीएम नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 25 अप्रैल को वाराणसी में रोड शो करेंगे. इसके बाद मोदी शुक्रवार को अपना पर्चा भरेंगे. धुर विरोधी भी उनकी जीत को तय मान रहे हैं. भाजपा के लिए वाराणसी से मोदी को जीताना बड़ी चुनौती नहीं है, बल्कि, यह है कि मोदी की जीत को रिकॉर्ड स्तर पर बड़ा करना है. 2014 में मोदी ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को हराया था. जीत का अंतर 36.07% वोट का था. अगर वाराणसी सीट की बात करें तो जीत के बड़े अंतर में नरेंद्र मोदी तीसरे स्थान पर हैं. 1977 में 48.80% के साथ पहले नंबर पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और 1989 में 39.82% के साथ दूसरे स्थान पर अनिल शास्त्री थे.

2014 में चुनाव में वाराणसी में 1,766,487 वोटर थे, इनमें से 10,30,685 वोट पड़े थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले थे. नरेंद्र मोदी अपने निकटतम प्रतिद्वंदी आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 371,784 वोटों से हराया था. दूसरे स्थान पर रहने वाले आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले.

जानिए… कब किसने बड़े अंतर से जीता काशी
1977 लोकसभा चुनाव: भारतीय लोकदल के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को 233,194 वोट मिले थे. चंद्रशेखर ने कांग्रेस के राजाराम को 171,854 वोटों से हराया था. राजाराम को 61,340 वोट मिले थे. तब यहां 358,755 वोटर थे. जीत का अंतर 48.80% था.

1989 लोकसभा चुनाव: जनता दल के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री को 268,196 वोट मिले थे. अनिल शास्त्री ने कांग्रेस के श्यामलाल यादव को 171,603 वोटों से हराया था. श्यामलाल यादव को 96,593 वोट मिले थे. तब यहां 444,042 वोटर थे. जीत का अंतर 39.87% था.

2014 लोकसभा चुनाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले थे. मोदी ने अरविंद केजरीवाल को 371,784 वोटों से हराया था. अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले. तब यहां 10,30,685 वोटर थे. जीत का अंतर 36.07% था.

अजय राय फिर देंगे मोदी को टक्कर
वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कांग्रेस के अजय राय एक बार फिर टक्कर देंगें. पांच बार के विधायक रहे अजय राय 2014 का चुनाव भी पीएम मोदी के खिलाफ लड़ चुके हैं. इस दौरान उनकी जमानत जब्त हो गई थी. इसके बाद 2017 में वह अपनी पिंडरा विधानसभा सीट से भी चुनाव हार गए थे. खास बात है कि अजय राय ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बीजेपी से की थी.

शुरुआत में अजय राय बीजेपी की यूथ विंग के सदस्य थे. 1996 में अजय बीजेपी के टिकट पर वाराणसी की कोइलसा विधासनभा सीट से चुनाव लड़े. उन्होंने 9 बार के सीपीआई विधायक उदल को 484 मतों के अंतर से हराया था. 2002 और 2007 का भी चुनाव अजय राय बीजेपी के टिकट पर इसी विधानसभा क्षेत्र से लड़े और जीते.

2009 में अजय राय वाराणसी लोकसभा सीट से बीजेपी का टिकट चाहते थे. पार्टी ने उन्हें टिकट देने से मना किया तो वह बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. 2009 का चुनाव अजय राय सपा के टिकट पर वाराणसी से लड़े और तीसरे नंबर पर रहे. अजय राय को इस चुनाव में 1.23 लाख वोट मिले थे. इस चुनाव में बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी जीते थे और दूसरे नंबर पर बसपा के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी थे.

वाराणसी की राजनीतिक पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी को अपना संसदीय क्षेत्र के रूप में चुने जाने से इस सीट का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है, हालांकि इसके संसदीय इतिहास की बात करें तो नरेंद्र मोदी के आने से पहले वाराणसी से 2009 का चुनाव बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने लड़ा था और विजयी रहे थे. 2014 में भी जोशी यहीं से लड़ना चाहते थे, लेकिन मोदी की वजह से उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ गई थी.

1952 से ही वाराणसी का संसदीय इतिहास शुरू हो गया था. 1952 में वाराणसी (सेंट्रल) से कांग्रेस के रघुनाथ सिंह को जीत मिली थी और वह 1962 तक यहां से लगातार 3 बार विजयी रहे थे. इस सीट पर 1967 के चुनाव में सत्यनारायण सिंह ने कम्युनिस्ट पार्टी की टिकट पर लड़े और कांग्रेस से यह सीट झटकते हुए विजयी रहे थे.

1990 के दशक देश में मंदिर राजनीति शुरू होने के बाद बीजेपी एक नई ताकत के रूप में उभरी और 1991 से 1999 तक लगातार 4 चुनावों में बीजेपी को जीत हासिल हुई. हालांकि 2004 के चुनाव में कांग्रेस ने लंबे समय बाद वापसी की और उसके उम्मीदवार डॉक्टर राजेश कुमार मिश्रा ने यहां से 3 बार के सांसद शंकर प्रसाद जयसवाल को हरा दिया. फिर 2009 के चुनाव में बीजेपी ने कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी को टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल करते हुए अपनी पार्टी की पकड़ को बनाए रखा. फिर 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने यहां आकर बड़ी जीत हासिल की और देश के प्रधानमंत्री पद पर काबिज हुए. 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी के रूप में अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं.

काशी का सामाजिक ताना-बाना
2011 की जनगणना के मुताबिक 36.8 लाख है जिसमें 19.2 लाख (52%) पुरुष और 17.5 लाख (48%) महिलाओं की आबादी शामिल है. इनमें से 86% आबादी सामान्य वर्ग की है, जबकि 13% आबादी अनुसूचित जाति की है और महज 1% आबादी अनुसूचित जनजाति की है. इसमें 57% यानी 20.8 लाख आबादी ग्रामीण इलाकों में और 43% यानी 16 लाख आबादी शहरी इलाकों में रहती है.

धर्म के आधार पर वाराणसी में 85 फीसदी आबादी हिंदुओं की है जबकि 15 फीसदी मुस्लिम समाज के लोग रहते हैं. यहां के लिंगानुपात का अनुपात देखा जाए तो प्रति हजार पुरुषों पर 913 हिंदू और 915 मुसलमान महिलाएं रहती हैं. वाराणसी का साक्षरता दर 76% है जिसमें 84 फीसदी पुरुषों की आबादी तो 67% महिलाओं की आबादी साक्षर है.

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

कश्मीर पर राहुल ने कही ऐसी बात, पाकिस्तान में होने लगी चर्चा

नई दिल्ली कश्मीर दौरे से लौटाए जाने के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)