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टूलिंग घोटाले में भेल के अफसरों को चार्जशीट

भोपाल

भेल कारखाने में कुछ अफसरों को टूलिंग घोटाले में चीफ विजिलेंस आफिसर ने न केवल चार्जशीट थमाई बल्कि पेनाल्टी भी लगा डाली। मामला बेहद ही गंभीर बताया जा रहा है। कुछ अफसरों ने ओपन टेंडर करने के बजाय लिमिटेड टेंडर कर एक सप्लायर कंपनी को लाखों का फायदा पहुंचाया। मजेदार बात यह है कि यह काम लंबे समय से चल रहा था। इस घोटाले की शिकायत सीवीओ को की गई थी। चर्चा है कि जांच के बाद सीवीओ ने अपर महाप्रबंधक कवलजीत सिंह, डीजीएम संजीव सक्सेना, डीजीएम यूएस मीणा, डीजीएम एसएन शर्मा, वरिष्ठ अभियंता नीरज निमेश, प्रकाश आदमे  सहित तीन अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। इसी सप्लायर को कुछ अफसर रिपिट पर रिपिट ऑर्डर दिये जा रहे थे। हालात तो यहां तक पहुंच गये कि कारखाने में आने वाले टूल्स के बक्से खाली तक पाये गये। इसे पिछले साल अपै्रल माह में ही पकड़ा था। तो एक और जहां शीर्ष प्रबंधन खर्चों में कमी की बात कर रहा है तो वहां कारखाने के कुछ ब्लॉकों में आज भी लिमिटेड टेंडर के माध्यम से अनाप-शनाप खरीदी का काम जोरों पर होने की चर्चा हैं।

भेल की विजिलेंस मीट में फटकार

भेल भोपाल विजिलेंस कितना बेहतर काम कर रही है या नहीं इसकी जानकारी दिल्ली सीवीओ तक पहुंच गई है। लगातार इस कारखाने में चांदी चोरी और कॉपर चोरी के साथ कई आयटम चोरी होने की घटनाओं को लेकर जहां प्रबंधन परेशान है वहां सीवीओ भी गंभीर दिखाई दे रहा है। चर्चा है कि पिछले दिनों आनन-फानन में एक विजिलेंस मीट दिल्ली में आयोजित की गई इस मीट में भेल भोपाल यूनिट के चार विजिलेंस आफिसर को खास तौर पर बुलाया गया था। चर्चा है कि इन सब बातों को लेकर सीवीओ ने जमकर फटकार लगाई। चर्चा यह भी है कि दिल्ली में दो दिन चली मीट के कारण कारखाने के प्रशासनिक भवन स्थित विजिलेंस आफिस दो दिन बंद दिखाई दिया। यहां भेल कर्मचारी यह भी कहने लगे हैं कि यदि इस यूनिट विजिलेंस विभाग पूरी तरह सतर्क हो जाये तो समझो कि कारखाने से चोरी जैसी घटनाएं तो बंद हो ही सकती है जो कारखाने की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है।

क्या तौरानी बनेंगे फेब्रीकेशन के महाप्रबंधक

इन दिनों कारखाने के थर्मल विभाग के महाप्रबंधक मोतीलाल तौरानी को फेब्रीकेशन विभाग भेजे जाने की अटकलें लगने लगी है। चर्चा है कि थर्मल विभाग को कार्पोरेट प्रबंधन ने जितना टारगेट दिया था वह पूरा नहीं कर पाया। इसके चलते जहां श्री तौरानी से न केवल कार्पोरेट नाराज है बल्कि स्थानीय प्रबंधन भी परेशान है। दूसरी और प्रशासनिक स्तर पर जीएम टरबाईन बनाने की अटकलें लगाई जा रही हैं ऐसे में हाईड्रो और थर्मल विभाग एक ही महाप्रबध्ंाक को सांैपा जा सकता है। इसके पीछे कारण कुछ भी हो लेकिन यदि थर्मल जीएम टरबाईन के पेटर्न पर हाईड्रो के पास चला जाता है तो भी श्री तौरानी को फेब्रीकेशन भेजने का रास्ता साफ हो जायेगा। खबर है कि जीएम टरबाईन बनाने का फैसला पूर्व जीएम विजय जोशी और श्री लाल के समय हो चुका है। क्योंकि थर्मल ग्रुप में इसी पेटर्न पर सभवत: पीके मिश्रा को जीएम टरबाईन बनाया जा सकता है। यहां यूपी से न्यूक्लियर टरबाईन के काफी आर्डर आ रहे हैं। इस बात में दम है कि नहीं यह तो वक्त ही बताएगा।

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