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भेल के संग्रहालय में हरिद्वार, भोपाल, बेंगलूरू, झांसी और कई यूनिटों के दिखेंगे उपकरण

 28 मई को भेल के चेयरमेन व मेनेजिंग डायरेक्टर अतुल सोबती भोपाल में करेंगे संग्राहलय का उदघाटन

भोपाल

भेल भोपाल की स्थापना के पांच दशक बाद यहां कंपनी में निर्मित उपकरण नये संग्राहलय में दिखेंगे। मप्र के लोगों के लिए यह संग्राहलय कई मायनों में ज्ञानवर्धक होगा। इसका निर्माण पहली बार क्षितिज भवन के पास पिपलानी में किया जा रहा है। इस भवन को संवारने का कार्य अंतिम दौर में चल रहा है। इसका उदघाटन 16 मई को होना था लेकिन चेयरमेन का विदेश में होने के कारण इसकी तारीख 28 मई निर्धारित की जा सकती है। खास बात यह है कि इस संग्राहलय की मांग काफी समय से की जा रही थी। काफी प्रयास के बाद भेल के चेयरमेन श्री सोबती ने इस संग्राहलय को भोपाल में बनाने की स्वीकृति प्रदान की है।

भोपाल में यह एक अनुकरणीय काम है। इसके लिए भेल की त्रिचनापल्ली, हैदराबाद, हरिद्वार, भोपाल, बेंगलूरू सहित कई यूनिटों में बने उपकरण इस संग्राहलय में दिखाई देंगे। इसके शुरू होने के बाद मप्र जो लोगों के लिए भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स जैसी महारत्न कंपनी में निर्मित भारी उपकरणों को देखने के साथ समझने का मौका भी देंगे। खास तौर पर छात्र-छात्राओं के लिए यह काफी फायदेमंद साबित होगा।

सूत्रों के मुताबिक भेल कार्पोरेट ने 660 मेगावाट सुपर क्रिटिकल बॉयलर मॉडल, जीआईएस, हाई प्रेशर चेक वाल्व, सेफ्टी वाल्व, हाई प्रेशर गेट वाल्व, फुल बोर गेट वाल्व, क्वीक क्लोसिंग नॉन-रिटर्न वाल्व, 1200 केवी, 330 एमवीए, 1 फेस ऑटो ट्रांसफार्मर का मॉडल, फ्रांसिस रनर, पेल्टन रनर, कपलान रनर, हाईड्रोजन जनरेटर और टरबाईन का मॉडल, थर्मल पॉवर स्टेशन का मॉडल, हाईड्रो पॉवर स्टेशन का मॉडल, वालमेट डीएनए पेनल, सी एण्ड आई पेनल, कन्डेनशिंग स्टीम टरबाईन जनरेटर, सोलर मॉडल, फ्लोटिंग सोलर पेनल, रीहन्द- देल्ही एचवीडीसी थाईरिस्टर माडयुल, पंप्स, गेस टरबाईन और जनरेटर का मॉडल, टीजी रोटर शॉफ्ट, को जन प्लांट बीपीसीएल मुंबई, स्टेटर फ्रेम, स्टेटर कोर, एलपी मूविंग ब्लेड की आदि की प्रदर्शनी इस संग्राहलय में लगाई जायेगी।

भेल भोपाल ने देश में पहली बार 30 एमवीए क्षमता वाला ट्रांसफॉर्मर बनाकर बिजली के उपकरणों के क्षेत्र में कदम रखा था। भेल के न्यू ट्रांसफॉर्मर ब्लॉक में 12 हजार एमवीए, पुराने ब्लॉक में 15 हजार एमवीए क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मरों का निर्माण वर्तमान में किया जा रहा है। मदर यूनिट द्वारा कुल 30 हजार एमवीए क्षमता तक ट्रांसफॉर्मरों का निर्माण किया जा सकता है। वहीं 500 से 1200 केवी क्षमता वाले उपकरणों को भी यहां आकार दिया जा रहा है। अब तक भोपाल यूनिट में 24500 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर बना चुका है। भेल में स्थापना के बाद से गोल्डन जुबली के दौर तक बनाए गए उत्पादों ट्रांसफॉर्मर, टरबाइन, इलेक्ट्रिक मोटर, सोलर पैनल, स्विचगियर पैनल आदि को संग्रहालय के अंदर प्रदर्शनी के रूप में रखा जाएगा। इसी के साथ यहां भेल के इतिहास में हुए कामों को चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। ज्ञात हो कि देश में बिजली के रोशनी फैलाने में बीएचईएल को नंबर वन कंपनी का तमगा भी मिल चुका है। पिपलानी स्थित क्षितिज भवन के पास इग्नू के पुराने भवन को रेनोवेट कराकर म्यूजियम को आकार दिया जा रहा है। संग्रहालय परिसर में मेक इन इंडिया की आकृति को सिल्वर स्टील से आकर दिया गया है, जो लोगों के लिए चर्चा का विषय बनेगा। इस आकृति को बड़ा स्वरूप दिया गया है। इसे के्रन के सहारे स्थापित किया जा रहा है। भवन के आसपास सड़कों का भी निर्माण किया गया है।

म्यूजियम की इन उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जायेगी।
. 660 मेगावाट सुपर क्रिटिकल बॉयलर मॉडल
. जीआईएस
. हाई प्रेशर चेक वाल्व
. सेफ्टी वाल्व
. हाई प्रेशर गेट वाल्व
. फुल बोर गेट वाल्व
. क्वीक क्लोसिंग नॉन-रिटर्न वाल्व
. 1200 केवी, 330 एमवीए, 1 फेस ऑटो ट्रांसफार्मर का मॉडल
. फ्रांसिस रनर
. पेल्टन रनर
. कपलान रनर
. हाईड्रोजन जनरेटर और टरबाईन का मॉडल
. थर्मल पॉवर स्टेशन का मॉडल
. हाईड्रो पॉवर स्टेशन का मॉडल
. वालमेट डीएनए पेनल
. सी एण्ड आई पेनल
. कन्डेनशिंग स्टीम टरबाईन जनरेटर
. सोलर मॉडल
. फ्लोटिंग सोलर पेनल
. रीहन्द- देल्ही एचवीडीसी थाईरिस्टर माडयुल
. पंप्स
. गेस टरबाईन और जनरेटर का मॉडल
. टीजी रोटर शॉफ्ट
. को जन प्लांट बीपीसीएल मुंबई
. स्टेटर फ्रेम
. स्टेटर कोर
. एलपी मूविंग ब्लेड

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