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भेल में कौन बनेंगे ईडी

भोपाल

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड में 27 महाप्रबंधक कार्यपालक निदेशक बनने की कतार में खड़े हैं। इनमें जीएमआई और जीएम प्रमुख को लगभग कार्यपालक निदेशक बनाना लगभग तय माना जा रहा है। यूं तो दिसम्बर 2019 तक और भी कार्यपालक निदेशक रिटायर होंगे। चर्चा है कि आज की स्थिति में 16 जीएमआई और तीन जीएम प्रमुख प्रबल दावेदार बन गए हैं। इस हिसाब से कुल 19 का कार्यपालक निदेशक बनना लगभग तय है। भोपाल यूनिट से महाप्रबंधक एके आर्या भी रिटायरमेंट के पूर्व साक्षात्कार देंगे। भोपाल यूनिट में काम कर चुके हरिदार के जीएमआई संजय गुलाटी और जगदीशपुर के जीएमआई भी अपना भाग्य आजमाएंगे। खास बात यह है कि दो महाप्रबंधक 2014 तक के बने हैं उन्हें ही इस साक्षात्कार में शामिल किया गया है। रही बात जीएमआई बनने की तो अभी चेयरमैन ने पत्ते नहीं खोले हैं। फिर भी यह चर्चाओं में है कि विशाखापट्टनम के जीएम प्रमुख राजीव सिंह और दिल्ली के जीएम टीके बागची को जीएमआई बनाया जा सकता है। इधर भेल भोपाल यूनिट के नए ईडी के लिए ईडी बनने की कतार में खड़े एके जैन का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। जबकि राजीव सिंह भी भोपाल के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।

चेयरमेन को मिल सकता है एक्सटेंशन

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर को दो साल का एक्सटेंशन मिलने की अटकलों का बाजार गर्म हैं। दरअसल वह इसी साल रिटायर होने वाले हैं और उनकी जगह नए चेयरमैन का चयन भी हो चुका है लेकिन उन्हें भी अपनी मूल कंपनी में एक्सटेंशन मिल चुका है। कंपनी में इस बात की चर्चा है कि वर्तमान चेयरमैन एक तो भेल से जुड़े हुए हैं दूसरा उनके पास अनुभव की कमी नहीं है ऐसे में उन्हें कंपनी को आगे बढ़ाने का एक और मौका दिया जायेगा। इसके लिए चेयरमेन साहब की फ ाइल अगले माह के अंत तक क्लीयर हो सकती है। यह भी कहा जाने लगा है कि श्री सोबती ने कम्पनी का प्राफि ट बढ़ाने के साथ कंपनी की सोच को बदलने की कोशिश भी की है। अब इस महारत्न कम्पनी में इस बात की चर्चा होने लगी है कि सोबती साहब नहीं तो कुछ नहीं।

कस्तूरबा का सीएमओ कौन

आजकल भेल के कर्मचारियों में इस बात की चर्चाएं हैं कि कस्तूरबा अस्पताल का सीएमओ कौन है। दरअसल एक पूर्व सीएमओ का हस्तक्षेप कस्तूरबा अस्पताल में देखा जा रहा है। चाहे अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़ा मामला हो या फिर कोई और। पूर्व सीएमओ ही करते दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं कस्तूरबा प्रमुख का वाहन भी पूर्व सीएमओ के काम आ रहा है। भले ही वर्तमान सीएमओ और पूर्व सीएमओ पारिवारिक हों लेकिन पूर्व सीएमओ का बढ़ता हस्तक्षेप कर्मचारी ही नहीं बल्कि ट्रेड यूनियन नेताओं को भी काफी खल रहा है। रही बात भेल के शीर्ष प्रबंधन की तो वह इन बातों को नजरअंदाज करते दिखाई दे रहा है। ऐसे में बात बढऩा लाजमी है। वैसे भी एक समय इस अस्पताल का काफी नाम था लेकिन पिछले पांच सालों में अस्पताल की दशा सुधरती दिखाई नहीं दे रही है। एक कर्मचारी नेता तो पूर्व सीएमओ से वर्तमान सीएमओ के काम में हस्तक्षेप को लेकर भेल कारपोरेट में शिकायत करने का मन बना चुके हैं।

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