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मोदी 2.0: रुझान आते ही शुरू हो गया था ऐक्शन, रोजगार पर जोर

नई दिल्ली

दिन: गुरुवार, समय: दोपहर 2 बजे। लोकसभा चुनाव मतगणना के रुझानों से साफ हो गया था कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी प्रचंड बहुमत से वापसी कर रहे हैं। 7 चरणों में हुए चुनाव की डाली गई करीब 60 करोड़ वोटों की गिनती अभी जारी थी। नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के तौर पर वापसी लगभग तय हो गई थी। अब बिल्कुल भी समय जाया नहीं किया जा सकता था। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज और उनके तेवर 2014 के मुकाबले काफी अलग होने वाले थे। इस बार उनके पास दिल्ली की सत्ता के गलियारों की जानकारी और केंद्र में काम करने का 5 साल का अनुभव भी है।

जैसे-जैसे रुझान साफ होते गए, वैसे-वैसे दिल्ली की सत्ता के गलियारों में एकाएक एक्टिविटी बढ़ गई। सुरक्षा बलों ने ट्रैफिक पुलिस से रायसिना हिल्स के पास पार्क किए गए वाहनों को क्लीयर कराने को कहा। सुरक्षा बल पीएम मोदी के काफिले के बीजेपी हेडक्वॉर्टर पहुंचने की तैयारी कर रहे थे।

सड़क के साथ नीति आयोग के दफ्तर में हलचल
जहां सड़क पर ट्रैफिक की हलचल बढ़ रही थी, वहीं सरकार के थिंकटैंक माने जाने वाले नीति आयोग की नई बिल्डिंग के पांचवे फ्लोर पर भी गतिविधि तेज हो गई थी। इसी फ्लोर पर नीति आयोग के चेयरमैन अमिताभ कांत का ऑफिस है। कांत ने तत्काल सीनियर अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। माना जा रहा है कि इसका निर्देश उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से आया था। इस मीटिंग का अजेंडा था नई सरकार का पांच साल का रोडमैप तैयार करना।

अमिताभ कांत ने ईटी मैगजीन को दिए इंटरव्यू में बताया, ‘मंत्रालयों ने पहले ही 100 दिन का ऐक्शन प्लान तैयार कर लिया था, नीति आयोग ने भी तैयारी पूरी कर ली थी। सिर्फ प्रधानमंत्री को अंतिम फैसला लेना था। 100 दिन की योजना में कई कड़े फैसले लेना और सुधार के काम करने का लेखा-जोखा था।’

रोजगार पर ज्यादा फोकस
मोदी सरकार-2 की योजनाओं में कंस्ट्रक्शन, टूरिजम और टैक्सटाइल्स जैसे सेक्टर में जरूरी परिवर्तन करने की योजना है, ताकि इन क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा रोजगार उत्पन्न हो। और इससे क्रेडिट फ्लो और निजी निवेश को गति देने के लिए उपयुक्त तरीके ढूंढे जा सके। आने वाले दिनों में सरकार के मुंह से आप जिन शब्दों को सबसे ज्यादा सुनने वाले हैं, उनमें ‘एग्री-बिजनेस’, ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘$5 ट्रिलियन की इकॉनमी’ शामिल हैं।

ईटी मैगजीन ने 3 महत्वपूर्ण मंत्रालयों (वाणिज्य-उद्योग, कृषि और रेलवे) के अहम लोगों से बात की, ताकि यह जाना जा सके कि सरकार के 100 दिन का ऐक्शन प्लान क्या है। कई मंत्रालयों को बहुत रूढ़िवादी होने के कारण कार्य योजना को संशोधित करने के लिए कहा जा सकता है। कई मंत्रालय के इसे लेकर सावधान है कि 100 दिन के बाद उनसे पूछा जाएगा कि उनका टारगेट कितना हासिल हो पाया।

100 दिन के ऐक्शन प्लान पर नजर
ऐसे में साफ है कि मोदी सरकार- 2 के तहत सुधार को लेकर 2 प्रबल संभावनाएं हैं। पहली, 100 दिन के ऐक्शन प्लान में उन चीजों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें 100 दिन में शामिल किया जा सके। इस परिदृश्य में, बड़ी योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत होगी, जिन्हें बजट के लिए छोड़ दिया जाएगा। संभावना है कि बजट जुलाई की शुरुआत में प्रस्तुत किया जा सकता है।

दूसरी संभावना है कि 100 दिन के ऐक्शन प्लान में उन बड़े सुधारों का परिचय कराया जाए, जिन्हें लेकर मोदी सरकार आगे चलने वाली है। यहां एक चेतावनी की जरूरत है- 100 दिन का ऐक्शन प्लान प्रधानमंत्री कार्यालय की पहल होता है। यह बजट योजनाओं के साथ आगे बढ़ेगा, जो नॉर्थ ब्लॉक में बनेगा और नए वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाएगा। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पीएम मोदी अपनी दूसरी पारी के सबसे बड़े सुधारों का ऐलान खुद नहीं करेंगे?

रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक बड़ी शुरुआत है। दो और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) बनाना और और ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करना। इन योजनाओं को आने वाले बजट में ही जगह मिल सकती है। इन्हें 100 दिन के ऐक्शन प्लान में शामिल नहीं किया जा सकता है।

रेलवे की योजना है कि माल ढुलाई की हिस्सेदारी को 2032 तक 25% से 50% तक बढ़ाया जाए। इसके लिए डीएफसी को महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में दो डीएफसी- पश्चिमी (दिल्ली-मुंबई 1504 किमी) और पूर्वी (दिल्ली-कोलकाता 1956 किमी) बन रहे हैं। चार और डीएफसी की संभावना अभी हैं, जिसमें मुंबई-चेन्नै, कोलकाता-चेन्नै, दिल्ली-चेन्नै और मुंबई-कोलकाता शामिल हैं।

5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने पर जोर
ईटी को मिले एक लिखिज जवाब में वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा, ‘भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कई बेहद कड़े फैसले लेने होंगे। अगली सरकार स्टार्ट-अप इंडिया, एग्री-एक्सपोर्ट नीति और ईज-ऑफ डुइंग बिजनस को लेकर अपनी योजनाओं के आगे बढ़ाएगी।’
“भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कई बेहद कड़े फैसले लेने होंगे। अगली सरकार स्टार्ट-अप इंडिया, एग्री-एक्सपोर्ट नीति और ईज-ऑफ डुइंग बिजनस को लेकर अपनी योजनाओं के आगे बढ़ाएगी।”-सुरेश प्रभु

2019 की राह थोड़ी आसान
2019 में मोदी के पक्ष में जो सबसे ज्यादा है, वह यह है कि वह दिल्ली और यहां की नौकरशाही से ज्यादा अनभिज्ञ नहीं है। 2014 में मोदी बिल्कुल नए थे और उन्हें इस बारे में समझना था कि आखिर प्रधानमंत्री कार्यालय काम कौसे करता है। इसके लिए उन्होंने कुछ ऐसे ब्यूरोक्रेट्स का चयन किया, जिन पर उन्हें पहले से भरोसा था। जैसे पीके मिश्रा, हसमुख अधिया और अमिताभ कांत इसके साथ ही अजित कुमार सेठ जैसे ब्यूरोक्रेट को भी अपपी टीम में शामिल किया, जो मनमोहन सरकार में कार्यरत थे। यहां पीएम ने मनमोहन सरकार की तरह आते ही अपने अधिकारियों को नहीं बदला।

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