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ऑटो कंपनियों के बुरे दिन! खड़ी हैं 35 हजार करोड़ की कारें

नई दिल्ली,

देश में ऑटोमोबाइल कंपनियों को पैसेंजर व्हीकल की डिमांड में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. देश में पैसेंजर व्हीकल की कम डिमांड और कम सेल के चलते हजारों गाड़ियां अनसोल्ड रह गई हैं. कम बिक्री और मांग की खास वजहों में से एक है नौकरी की धीमी गति, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और वित्तीय कंपनियों के बीच लिक्विडिटी का संकट. इसकी वजह से देश की कई बड़ी ऑटो कंपनियों के प्रोडक्शन में कमी आई है.

कई बड़ी ऑटो कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने अपने पिछले प्रोडक्शन के स्टॉक को क्लियर करने के लिए प्रोडक्शन को रोका है. इन कंपनियों ने जून के महीने में प्लान्ट शटडाउन की घोषणा की है. इनमें से कुछ आने वाले महीनों में शटडाउन की घोषणा करेंगी.

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजार में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को पैसेंजर व्हीकल की डिमांड में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. कारों की मांग में कमी पिछले 7 महीनों से आई है, जिससे कंपनी डीलरशिप के इन्वेंटरी में बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की डीलरशिप में अब 5 बिलियन डॉलर (35,000 करोड़ रुपये) के अनसोल्ड कारों की इन्वेंटरी मौजूद है.

ET ने अपनी रिपोर्ट में ये भी बताया है कि ऑटो कंपनियों के प्रोडक्शन बंद होने से मई-जून 2019 के दौरान इंडस्ट्री आउटपुट लगभग 20 प्रतिशत कम हो जाएगा. इससे कंपनी इन्वेंटरी में प्रेशर कम करने में मदद मिलेगी. ऐसे में बुरे दौर से गुजर रहे डीलर्स को भी राहत मिलेगी. क्योंकि कंपनी डीलर्स को भी उनके स्टॉकयार्ड के अनसोल्ड व्हीकल्स के लिए GST का भुगतान करना होता है.

मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने मई के महीने में भी कई दिनों के लिए प्रोडक्शन बंद कर दिया था. कई और बड़ी कंपनियां जैसे होंडास रेनो-निसान और स्कोडा ऑटो भी अपने प्रोडक्शन को 10 दिनों के लिए बंद करने की तैयारी में है.

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