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2018 में 7 चक्रवाती तूफान, 343 लोगों की गई थी जान

नई दिल्ली,

गुजरात की ओर लगातार बढ़ रहे चक्रवाती तूफान वायु से निपटने के लिए सरकार ने सारी व्यवस्थाएं कर रखी हैं. लेकिन, जब चक्रवाती तूफान भयावह रूप लेता है तो सारी तैयारी धरी की धरी रह जाती है. 1967 से अब तक कुल 121 बार चक्रवाती तूफान आए है. सबसे ज्यादा चक्रवाती तूफान पिछले साल आए. सिर्फ चक्रवाती तूफान से पिछले साल 343 लोगों की मौत हुई और करीब 4000 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में देश में आई प्राकृतिक आपदाएं, जिसमें चक्रवाती तूफान भी शामिल हैं, उनमें कुल 2057 लोगों की मौत हो गई. 46,888 मवेशियों मारे गए और 915,878 मकान ध्वस्त या क्षतिग्रस्त हो गए. वहीं, 2017 में आई प्राकृतिक आपदाओं में 1487 लोग और 41,965 मवेशी मारे गए. जबकि, 546,518 मकान ध्वस्त या क्षतिग्रस्त हो गए. 2018 के अंतिम चार महीनों में सबसे ज्यादा परेशान करने वाले चक्रवाती तूफान आए.

पिछले साल सबसे ज्यादा 7 चक्रवाती तूफान आए. वर्ष 2018 में मई में 2, सितंबर में 1, अक्टूबर में 2, नवंबर में 1 और दिसंबर में 1 चक्रवाती तूफान आए. 19 सितंबर को पश्चिम बंगाल में आए चक्रवाती तूफान डे से 25 लोगों की मौत हुई. 6 अक्टूबर को आए चक्रवाती तूफान तितली की वजह से ओडिशा में 77 और आंध्र प्रदेश में 8 लोगों की मौत हुई. दोनों राज्यों में करीब 7 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. फिर 10 नवंबर को चक्रवाती तूफान गाजा आया. इसकी वजह से 52 लोगों की मौत हुई. 13 दिसंबर को चक्रवाती तूफान फेथाई आया. इस तूफान से आंध्र प्रदेश में 8 लोगों की मौत और करीब 300 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ.

पिछले साल उत्तर भारत में आए चक्रवाती तूफान
कुछ चक्रवाती तूफान को नाम नहीं सिर्फ नंबर दिया जाता है. इन्हें कम दबाव वाला तूफान कहते हैं. 26 जुलाई 2018 को आए बीओबी 03 चक्रवाती तूफान से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में तेज बारिश हुई. सबसे ज्यादा बारिश 226 मिमी मेरठ में दर्ज की गई. यूपी में 69 लोगों की मौत हुई. जबकि, दिल्ली में 1500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. इसके बाद अगस्त में बीओबी 05 और सितंबर में बीओबी 06 तूफान आया.

1990 से 2018 तक आए बड़े चक्रवाती तूफान
1990 – आंध्र प्रदेश
1996 – आंध्र प्रदेश
1999 – ओडिशा
2008 – तमिलनाडु में चक्रवाती तूफान निशा
2011 – तमिलनाडु और पुड्डूचेरी में चक्रवाती तूफान थाणे
2012 – तमिलनाडु में चक्रवाती तूफान नीलम
2013 – तमिलनाडु में चक्रवाती तूफान महासेन
2013 – ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान फैलिन
2014 – ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान हुदहुद
2015 – पश्चिम बंगाल
2016 – तमिलनाडु

दुनिया में जितने भी चक्रवाती तूफान आते हैं उनमें से सिर्फ 7% चक्रवाती तूफान उत्तरी हिंद महासागर में आते हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटों पर इनका असर सबसे ज्यादा होता है. चक्रवात को और खतरनाक बनाता है उस वक्त उठने वाली ऊंची लहरें. हालांकि, भारत का पश्चिमी तट, पूर्वी तट की तुलना में शांत है. मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी पर बनने वाले चक्रवाती तूफान या तो बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पूर्व में बनते हैं या उत्तर पश्चिम प्रशांत सागर पर बनने वाले चक्रवाती तूफान के अंश होते हैं, जो हिंद महासागर की ओर बढ़ते हैं. उत्तर पश्चिम प्रशांत सागर पर बनने वाले तूफ़ान वैश्विक औसत से ज्यादा होते हैं इसलिए बंगाल की खाड़ी पर भी ज़्यादा तूफ़ान बनते हैं. वहीं, अरब सागर पर बनने वाले चक्रवाती तूफान या तो दक्षिण पूर्व अरब सागर पर बनते हैं या बंगाल की खाड़ी पर बनने वाले चक्रवाती तूफान के अंश होते हैं. क्योंकि बंगाल की खाड़ी पर बनने वाले तूफ़ान ज़मीन से टकराने के बाद कमज़ोर पड़ जाते हैं इसलिए ऐसा कम ही होता है कि ये अरब सागर तक पहुंचें.

बंगाल की खाड़ी की तुलना में अरब सागर ज्यादा शांत
बंगाल की खाड़ी की तुलना में अरब सागर ठंडा है इसलिए इस पर अधिक तूफान नहीं आते. तूफान से तीन तरह के खतरे होते हैं, भारी बारिश, तेज हवाएं और ऊंची लहरें. इन तीनों में सबसे खतरनाक ऊंची लहरें ही हैं. गुजरात के आसपास के पश्चिमी तट पर ऊंची लहरें उठने का खतरा कम है. पूर्वी तट पर हम जैसे-जैसे तमिलनाडु से ऊपर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और प. बंगाल की ओर बढ़ते हैं तो ये ख़तरा बढ़ जाता है.

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