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भारत में सैलरी की समस्या, जॉब की नहीं: मोहनदास पई

बेंगलुरु

इन्फोसिस के पूर्व सीएफओ और दिग्गज निवेशक टी.वी. मोहनदास पई ने कहा है कि भारत में नौकरी की नहीं, वेतन की समस्या है। भारत में कम आमदनी वाली नौकरियों के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं, जिन्हें डिग्री होल्डर नहीं चाहते। उन्होंने बेरोजगारी के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए हैं। पीटीआई से उन्होंने कहा, ‘भारत में अच्छी नौकरियों के अवसर नहीं बन रहे हैं। 10-15 हजार रुपये की नौकरियां अधिक हैं, जिनकी ओर डिग्री होल्डर आकर्षित नहीं होते हैं। भारत में मजदूरी की समस्या है, काम की नहीं।’ उन्होंने कहा कि इसके साथ भारत में क्षेत्रीय और भौगोलिक समस्याएं भी हैं।

पई ने सलाह दी कि चीन की तरह भारत श्रम प्रधान उद्योग शुरू करे और बंदरगाहों के नजदीक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करे। साथ ही नौकरी करने वालों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हाईटेक R&D में अधिक निवेश करे।उन्होंने कहा, ‘हमें देखना चाहिए कि चीन ने क्या किया है। उन्होंने पहले श्रम प्रधान उद्योग लगाए। पूरी दुनिया को आमंत्रित किया कि इसके श्रम का इस्तेमाल करे और निर्यात का कारोबार किया। हमें श्रम प्रधान उद्योगों को बढ़ावा नहीं दिया है। हमारे पास सही नीति नहीं है। इसलिए हम अपने अधिक श्रम का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।’

पई ने यह भी रेखांकित किया कि चीन ने इलेक्ट्रॉनिक असेंबली और चीप निर्माण सहित हाईटेक रिसर्च और डिवेलपमेंट में भारी निवेश किया है। इको सिस्टम तैयार करने के लिए निचले स्तर पर बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि चीन ने तटीय इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाए, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया है।

गलत है बेरोजगारी के आंकड़े
पई ने कहा कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) द्वारा बेरोजगारी पर दिया गया आंकड़ा कि 2018 में 1.10 करोड़ लोगों को नौकरी चली गई, गलत है। उन्होंने कहा, ’15-29 साल की आयु के बीच बेरोजगारी को लेकर किए गए सर्वे में खामियां हैं।’ पई ने कहा कि रोजगार पर सबसे सही आंकड़ा ईपीएफओ का है, जो कहता है कि हर साल 60 से 70 लाख लोगों को संगठित क्षेत्र में रोजगार मिला।

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