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डायरेक्टर एचआर के साक्षात्कार

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल)कार्पोरेट के डायरेक्टर मानव संसाधन के साक्षात्कार का समय जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है तो कौन बनेगा इस पद का दावेदार इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। फिलहाल इस पद के लिए ईडी एचआर दिल्ली कार्पोरेट अनिल कपूर , भेल भोपाल यूनिट के महाप्रबंधक मानव संसाधन एम ईसादोर और कार्पोरेट के अधिकारी समीर मुखर्जी प्रबल दावेदार बताये जा रहे हैं। रही बात चयनकर्ताओं की तो वह किसका चयन करेंगे यह अन्दर की बात है। वैसे भी अधिकारी यह कहने से नहीं चूक रहे हंै कि हैवी इंडस्ट्रीज मिनिस्ट्री के अलावा आखिरी फैसला पीएमओ से ही होता है। यही कारण है कि चेयरमेन के एक्सटेंशन का मामला तीन बार पीएमओ तक पहुंच चुका है। खबर है कि भेल दिल्ली कार्पोरेट आफिस में डायरेक्टर मानव संसाधन पद के लिए साक्षात्कार 20 जून को होंगे। इसके लिए कार्पोरेट ईडी एचआर अनिल कपूर, भोपाल यूनिट के महाप्रबंधक मानव संसाधन एम ईसादोर, जीएम हाईड्रो विष्णु मुनि, एस मुर्ती, समीर मुखर्जी, ईडीएएआई संजय जैन, डायरेक्टर पीईआर सीसीएल राधेश्याम, सीपीओ रेल्वे श्रीमती अनुपम बैन, ईडी पीएण्ड ए रेल्वे एस बालाचन्द्रन अपना भाग्य आजमा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अपने भाग्य के सहारे भेल भोपाल के एम ईसादोर भी काफी हद तक यह पद पाने की होड़ में आगे दिखाई दे रहे हैं।

प्रमोशन के बाद रवानगी

देर आये दुरूस्त आये की तर्ज पर भेल कार्पोरेट ने एक नया फरमान जारी कर अफसरों में काफी हड़कं प मचा हुआ हैं। यूं कहा जाये इस फरमान से कुछ भ्रष्ट अफसरों की नींद हराम हो गई है। यूं तो ऐसे अफसर भी काम कर रहे हैं जिन्होंने प्रमोशन पाने के बाद पूरी उम्र एक ही यूनिट में गुजार दी है। भले ही प्रमोशन के बाद तबादले का कोटा कम हो लेकिन कुछ लाभ-शुभ के चलते अफसर प्रमोशन को ही दर किनार कर सकते हैं। अब तो यह भी कहा जाने लगा है कि कुछ तो ऐसे भी हैं जो खुद अपने रिश्तेदारों के नाम से अपने ही विभागों में न केवल ठेकेदारी कर रहे हैं बल्कि कमीशनखोरी चरम पर पहुंचा दी है। अब देखना यह है कि भेल में 25 जून को प्रमोशन लिस्ट जारी होने के बाद कौन सा अधिकारी बाहर यूनिट में जाना पसंद करेगा या अपने लाभ-शुभ के चलते इसी यूनिट में जमा रहेगा। जबकि ईमानदार अधिकारी तबादले वाले इस प्रमोशन पॉलिसी काफी खुश हैं क्योंकि उन्हें तो बाहर की यूनिट में परफार्मेंस दिखाना है।

रिटायरमेंट के बाद भी बल्ले-बल्ले

एक ऐसे अफसर के बारे में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि रिटायरमेंट के बाद भी उनके बल्ले-बल्ले रहेंगे। यूं तो इनके बारे में यह चर्चाएं भी थमने का नाम हीं ले रही है उनके कार्यकाल में भले ही उनके ऊपर सीबीआई और विजिलेंस का शिकंजा कई बार कसा लेकिन वह साहब फिर से जुगाड़ कर कहने को एक अदने से विभाग के मुखिया बन गये हों लेकिन इस विभाग में कमाने के क्या-क्या रास्ते निकाले यह तो वहीं जाने। यह साहब एफसीएक्स बिल्ंिडग में बैठकर इसी माह रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं। एक दिन एक उनके खास आदमी ने बातों ही बातों में यह बात भी कह डाली कि यूं तो भेल में एक से एक बड़े अफसर लेकिन उनके पास मात्र एक या दो बंगले होंंगे लेकिन एफसीएक्स बिल्ंिडग के साहब के तो तीन बंगले बन गये और एक में रह रहे हैं। कुल मिलाकर चार बंगलों के मालिक अब भोपाल के आसपास कृषि योग्य भूमि को खरीदने की तलाश में हैं। उन्हें तो सिर्फ है तो रिटायरमेंट का इंतजार ताकि वह अपने सारे काम खुलकर कर सके। लेकिन बदकिस्मती यह है कि भेल की विजिलेंस गांधी जीे के तीन बंदरों की तरह चुपचाप बैठी है।

मामला भेल सहकारी उपभोक्ता भंडार का

भेल की नजरें फिरते ही सहकारिता विभाग भेल सहकारी उपभोक्ता भंडार को बंधक बना लिया है। चार साल से पहले भारी भरकम लाभ में चल रहे इस भंडार को ऐसी नजर लगी कि यहां के कर्मचारियों को भूखों मरने की नौबत आ गई। लगातार संस्था में लूट सको तो लूट की तर्ज पर काम चल रहा है। तीन-तीन माह से भेल से भुगतान होने के बाद भी कर्मचाारियों को वेतन नहीं मिल रहा है। अब करे प्रशासक की बात तो सहकारिता विभाग में तीन प्रशासक बदल दिये। दो बार चुनाव की घोषणा भी हो चुकी है इस पर भंडार के दो लाख खत्म भी हो चुके अब तीसरी बार चुनाव की घोषणा होना बाकी है। अब सहकारिता विभाग खर्चे का रोना रो रहा है। इधर 24 अप्रैल को चुनाव की घोषणा के बाद भले ही चुनाव नहीं हुए हो लेकिन आज भी भेल के कर्मचारी पैनल बनाकर प्रचार कर रहे हैं। ऐसे में भगवान ही मालिक है भंडार का।

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