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मामला चेयरमेन के एक्सटेंशन का

भोपाल

यूं तो बिजली उपकरण बनाने वाली सबसे बड़ी महारत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल)में चेयरमेन व मेनेजिंग डायरेक्टर को एक्सटेंशन मिलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार यह एक्सटेंशन भेल के हर अधिकारी व कर्मचारी की दिल की धड़कनों को बढ़ा रहा है। दरअसल इसके पीछे इस बात की चर्चाएं गर्म हैं कि घाटे में चल रही इस महारत्न कंपनी की डूबती नैय्या को पिछले दो साल में किनारे पर लगाया है तो उसका नाम है अतुल सोबती। ऐसे में भेल से जुड़ा हर आदमी चाहता है कि जैसे-तैसे फिर से खड़ी हुई इस कंपनी के मुखिया को इस बार एक्सटेंशन जरूर मिल जाये। ईमानदार व कर्मठ श्री सोबती का मामला पीएमओ में विचाराधीन है। यह अटकलें लगने लगी हैं कि देर से लेकिन दुरूस्त आये की तर्ज पर उन्हें एक्सटेंशन तो जरूर मिलेगा।

एजीएम से जीएम अधर में

जब भेल में सभी वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी 25 जून को प्रमोशन का आनंद उठाएंगे तब अपर महाप्रबध्ंाक पद के दावेदार दु:खी नजर आयेंगे। दरअसल इस वर्ग के अफसरों के साक्षात्कार की तारीख तो घोषित कर दी लेकिन एन वक्त पर साक्षात्कार ही निरस्त कर दिये गये। ऐसे में बेचारे प्रमोशन के दावेदार आज भी नई तारीख के इंतजार में बैठे हैं। चर्चा है कि कार्पोेरेट दिल्ली, भोपाल और झांसी को छोड़कर सभी जगह इस पद के लिए साक्षात्कार हो चुके हैं। ऐसे में प्रमोशन पाने वालों की धड़कनें तेज हो गई है। यह कहा जाने लगा है कि यदि अब साक्षात्कार हुए तो प्रमोशन लिस्ट लंबी खींच जायेगी। दूसरी और यह भी अटकलें लगाई जाने लगी है कि कर्मचारी से लेकर उप महाप्रबध्ंाक स्तर के अफसरों की प्रमोशन लिस्ट तो 25 जून तक जारी हो जायेगी, लेकिन सीनियर डीजीएम से एजीएम की लिस्ट में देरी हो सकती है। संभवत: इस पद के दावेदार की डीपीसी को लेकर मामला उलझ गया है।

टीएसडी के साहब के मजे ही मजे

सैय्यां भये कोतवाल तो फिर डर काहे का वाली कहावत भेल कारखाने के टीएसडी विभाग में चर्चाओं में है। वैसे तो स्वीचगियर विभाग से कारखाने के किसी भी विभाग में किसी अधिकारी का तबादला किया गया हो वह मजे में हैं। टीएसडी विभाग के एक अधिकारी के तो कुछ ज्यादा ही मजे ही मजे है। शौकीन मिजाज साहब का एचआरडीसी विभाग से बड़ा गहरा रिश्ता है वह अपनी मनपंसद के आदमी को टीएसडी बुला लेते हैं। फिर आगे क्या होता है यह कारखाने के सभी लोग जानते हैं। यह भी चर्चा है कि यह साहब एक ही सैंपल की कई बार जांच कराते हैं। जबकि हर टेस्टिंग को अलग-अलग जांच होने के बाद भी एक ही सैंपल के चार्ज ले रहे हैं। इससे कंपनी को सीधा-सीधा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। फिलहाल गंभीर रूप से बीमार टीएसडी के इन साहब को एक वरिष्ठ अधिकारी कुछ ज्यादा ही संरक्षण प्राप्त है। इसके चलते उन्होंने विभाग में काफी मनमाने काम शुरू कर दिये हैं। इसको लेकर एक नेता जल्द ही चेयरमेन से मिलेगा बल्कि सीवीओ तक जाने की तैयारी भी कर चुके हैं।

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